बलिया में याद किये गए भारत छोड़ो आन्दोलन के नायक पं. चित्तू पाण्डेय

बलिया। 13 अगस्त क्रांति उत्सव के तहत आज भारत छोड़ो आन्दोलन के उस नायक पं. चित्तू पाण्डेय के स्मारक पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया।

जिन्हें शेरएबलिया के नाम से जाना जाता है। अंग्रेजी शासन से मुक्ति के लिये करो या मरो के संकल्प को लेकर सड़कों पर उतरी जिले की जनता अपने 27 बांकुरों को 16 व 18 अगस्त के संघर्ष में ब्रिटिश सरकार के पुलिस की गोलियों से शहीद करा चुकी थी। इस कुर्बानी ने पूरे जिले में आन्दोलन को धधका दिया था।

बाँसडीह तहसील, रेवती में स्वराज सरकार की चल रही थी। अब बारी बलिया जिला मुख्यालय पर कब्जा करने की थी। जिसके लिये लाखों की सशस्त्र भीड़ ने जिला मुख्यालय को घेर लिया था।

ब्रितानी सरकार के डीएम जेएस निगम और एसपी मु0 जियाउद्दीन अहमद के साथ- सभी अधिकारी कर्मचारी आजादी के दीवानों की ख़ूनी मंशा से भयभीत थे। उन्हें बस एक ही व्यक्ति तारनहार के रुप में दिखाई दे रहे थे, वह थे कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष पं0 चित्तू पाण्डेय जी जो जेल में बंद थे। डीएम एसपी उन्हें जेल से बाहर आने के लिये मनाने खुद जिला जेल पहुँचे।

सभी कैदियों की रिहाई के शर्त पर ससम्मान रिहा हुए, पं0 चित्तू पाण्डेय जी से डीएम ने प्रार्थना किया कि पाण्डेय जी आप किसी तरह से इस हिंसक भीड़ को वापस लौटाइये। अब आप ही इस जिले के कलक्टर हैं।

प्रशासन का कोई भी व्यक्ति सिविल लाइन्स एरिया के बाहर नहीं जायेगा। अपने नेताओं की रिहाई और टाऊनहाल में हुई सभा में चित्तू पाण्डे द्वारा यह समझाने के बाद कि अब बलिया में सुराज का शासन हो गया। आप सभी लोग अपने गाँव जाइये और शान्ति व्यवस्था बनाये रखिये। 19 अगस्त की शाम वह लाखों लोगों सैलाब वापस घरों को लौटा था। ऐसे अपने जनप्रिय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विधायक रहे नेता के स्मारक पर कैंडल जलाकर पुष्पांजलि अर्पित किया गया।

कार्यक्रम में संघ के पूर्व नगर संघचालक डाॅ0 बद्रीनारायण गुप्त, शिक्षक नेता डाॅ0 शिवकुमार मिश्र, नगरपालिका अध्यक्ष अजयकुमार समाजसेवी, सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के प्रान्तीय संगठन मंत्री शिवकुमार सिंह कौशिकेय, विजय बहादुर सिंह, आशीष, हफीज मस्तान, फतेहचन्द बेचैन आदि शामिल रहे।

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