चुनाव करीब आ गइल बा त.. ये लोग भी हो गए हैं सक्रिय!

बलिया। चुनावी विगुल क्या बजा लोग आज से ही चुनावी रंग में रंगते दिख रहे है। चुनावी सरगर्मी का आलम यह है कि चुनावी भविष्यवाणी करने वाले लोग अपने हिसाब से चुनाव माहौल बनाते व बिगाड़ते हैं। राजनीति का खेल के माहिर बस अपनी गुणा गणित में लगे हैं। हर कोई अपनी अपनी पार्टी को जीताने व विरोधियों को हराने की जुगत में लगा है।

कुछ इसी तरह का माहौल इस समय चल रहा है। गांव-गिरावं की तरफ लग्जरी गाड़ियां कूच करने लगी हैं। टोला- टोला दावत भी..ठंड का मौसम भी राजनीतिक गतिविधियों से गरमाने लगा है। नेता जी अब लग्जरी गाड़ियों का शीशा गिराकर उतरते नजर आ रहे हैं। यह सब सोचते हुए नागरिक अपने दरवाजे के बारह टहल रहा था। इसी बीच एक पार्टी का गर्दन में गमछा लगाए दस की संख्या में लोग आकर उससे कहते हैं कि गांव में आज नेता जी का कार्यक्रम है। आपको भी रहना है नेता जी ने कहा है। नागरिक इनकी उत्साहित बातों को सुनकर आने को कह देता है। इन लोगों के जाने के बाद नागरिक सोच में पड़ जाता है और कहता है कि गांव में त एको काम भइबे न कइल। एकरा बादो इ लोग उत्साहित हैं।

अब चुनाव करीब आ गइल बा त ये लोग भी सक्रिय हो गए हैं। अभी यह सोच ही रहा था कि गांव में धरीक्षन व जीतन में नेता के कार्यक्रम को लेकर मारपीट होने लगती है। यह सुनकर नागरिक भी इनके दरवाजे पर पहुंचता है तो पता चलता है कि दोनों पक्ष थाने गए हैं। नागरिक भी थाने पहुंचता है तो देखता है जिसको ज्यादा चोट लगी है उसी को पुलिस बैठा रखी है। साथ ही उसे तरह-तरह की धमकी भी दे रही है। इस बीच चोट खाए व्यक्ति पर मुकदमा दर्ज करने का दबाव दारोगा पर फोन से एक नेता जी बना रहे हैं। दारोगा सबकुछ सही जानते हुए भी गाली देते हुए उसे बंद कर देते हैं।

नागरिक इस पर टोकता है तो वह कहता है जाइए आप ज्यादा नेता गिरी न करें। इस पर वह गांव के किशुन व बिशुन के साथ गांव की तरफ चल देता है। गांव में नेता जी अपने सरकार की योजनाओं की जानकारी दे रहे हैं। लोगों की तालियां बटोर रहे हैं। इसमें मारपीट करने वाला एक पक्ष भी बैठा है। किशन व बिशुन नागरिक से कहते हैं यार यह तो यहां बैठा हुआ है। नागरिक वहां से सबकुछ देखते हुए चल देता है। कुछ ही देर बाद दूसरे दल के नेता का भी आगमन गांव के दूसरे टोला में हो जाता है। वे अपने चौपाल में सरकार की योजनाओं को फर्जी करार देने को कई तरह के तर्क जनता के बीच रख रहे हैं। इस पर नागरिक किशुन, बिशुन के साथ चट्टी पर आ जाता है। यहां पर चाय की मांग करता है तभी गांव में नेताओं के आगमन पर बहस शुरू हो गई।

इस पर नागरिक कहता है अरे यार आप लोग क्या नहीं समझ रहे कि एक नेता बताने आए हैं तो दूसरा भी आकर समझा गए। हमारे गांव के दो लोगों के बीच के मामले को कोई नहीं सुलझा पाया। ये सभी हम सभी को बांटकर अपनी गोटी सेट करने में लगे हैं। अब तो कम से कम हम सभी को जागना होगा।

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