अल्पसंख्यक भारत के अनिवार्य हिस्सा है : डा. आफताब आलम

बलिया। अल्पसंख्यक अधिकार दिवस पर मंगलवार को गड़वार रोड स्थित आल इंडिया इंनिस्च्यूट आफ परामेडिकल सांइस कैम्पस में एक गोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसमें संस्था के निदेशक डा. आफताब आलम ने अल्पसंख्यक के अधिकारों एवं रक्षा पर विचार व्यक्त कहा कि आज अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित लोगों के अधिकारों को बढ़ावा और संरक्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। ।

डा. आलम ने बताया कि भारत में अल्पसंख्यक देश का अनिवार्य हिस्सा हैं और वे देश के विकास और प्रगति में समान रूप से योगदान करते हैं। वे सरकारी कार्यालयों, राजनीति, इंजीनियरिंग, सिविल सेवाओं और लगभग हर क्षेत्र सहित लगभग हर क्षेत्र में उच्च पदों पर कब्जा कर रहे हैं। इस प्रकार भारत के अल्पसंख्यक काफ़ी हिफाज़त से हैं और उनके अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं। भारत एक विकासशील देश है और यदि कोई बहुसंख्यक-अल्पसंख्यक मुद्दे उत्पन्न होते हैं तो यहां के लोगों को समझदारी से व्यवहार करना चाहिए।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 हर व्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है। अनुच्छेद 25 यह सुनिश्चित करता है कि धार्मिक, भाषाई या जातीय अल्पसंख्यक समुदाय के प्रत्येक सदस्य के पास अपने धर्म का पालन करने के लिए अप्रतिबंधित प्राधिकार है। अल्पसंख्यकों के अधिकारों के बचाव और संरक्षण के संबंध में भारतीय संविधान का अनुच्छेद 30 भी बहुत महत्वपूर्ण हैं।

अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को उनकी संस्कृति और धर्म को समर्थन और संरक्षित करने के लिए असीमित और अप्रतिबंधित अधिकार हैं। भारत को अपनी सांस्कृतिक विविधता के लिए दुनिया भर में ख्याति प्राप्त है और भारत एक देश के रूप में अपनी सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करने के लिए समर्पित है। एक उपयुक्त उदाहरण यह है कि यद्यपि हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में घोषित किया गया है लेकिन भारत के अधिकांश राज्यों में मातृभाषा के माध्यम से प्राथमिक और प्रमुख शिक्षा प्रदान की जाती है। इसके अलावा भारत में लगभग 20 आधिकारिक भाषाएं हैं।

कहा कि भारत में बहुमत-अल्पसंख्यक मुद्दों पर अक्सर असहमति और चर्चा धार्मिक और राजनीतिक असंतोष पैदा करने के लिए उभरती है। भले ही भारतीय संविधान हमेशा अल्पसंख्यकों समेत सभी समुदायों को समान और न्यायपूर्ण अधिकार प्रदान करता था और प्रदान करता रहेगा लेकिन अल्पसंख्यकों के अधिकारों से संबंधित कुछ मुद्दे अभी भी जीवित हैं।

देश में अल्पसंख्यक अधिकार दिवस मना कर प्रत्येक राज्य अल्पसंख्यकों से संबंधित मुद्दों पर पूरी तरह से केंद्रित है और अच्छी तरह से यह सुनिश्चित करता है कि अल्पसंख्यकों के अधिकार उनके प्रांत के भीतर सुरक्षित हैंउन्होंने अल्पसंख्यक अधिकार दिवस पर संविधान द्वारा मिले अधिकारों को जन—जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। ताकि अल्पसंख्यक अपने अधिकारों से वंचित न जाये। इस अवसर पर बड़ी संस्था के छात्र—छात्राओं के अलावे अन्य लोग मौजूद रहे।

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