ख़राब रिपोर्ट कार्ड वाले 1 दर्जन मंत्रियों की योगी सरकार से जल्द हो सकती है छुट्टी

मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जून के पहले हफ्ते में अपने मंत्रिमंडल का पुनर्गठन कर सकते हैं। अभी उनको मिलाकर 47 सदस्यीय मंत्रिमंडल है। यह पुनर्गठन 2019 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर किया जाएगा।

मीडिया में आ रही रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फेरबदल जून के पहले हफ्ते में संभव है। माना जा रहा है कि यह फेरबदल कुछ मंत्रियों के खराब रिपोर्ट कार्ड और 2019 लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। इस फेरबदल के तहत करीब 1 दर्जन मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। बताया जा रहा है कि मंत्रियों के एक साल के कामकाज की समीक्षा की जाएगी और फिर उसके आधार पर मंत्रियों को मंत्रीमंडल से हटाया जाएगा, या फिर उनके विभागों में बदलाव किया जा सकता है। खबर है कि मंत्रीमंडल से हटाकर कुछ मंत्रियों को संगठन की जिम्मेदारी दी जा सकती है।

मंत्रिमंडल के पुनर्गठन में नए बने एमएलसी और कुछ भाजपा के केन्द्रीय संगठन में भूमिका निभाने वाले प्रदेश के बड़े नेताओं को भी मंत्रिमंडल में जगह देकर सरकार का साफ-सुथरा चेहरा होने का संदेश दिया जाएगा। पिछले एक साल में प्रभावी भूमिका निभाने वाले कुछ विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों को भी मंत्री बनाया जा सकता है। उन मंत्रियों की बेदखली तो बिल्कुल तय है, जिनके ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोप की चर्चा आम हो चुकी है। कुछ मंत्रियों को हटाने के पीछे प्रमुख वजह यह है कि उनके कामकाज से पार्टी का केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व ही खुश नहीं है।

फिलहाल उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्रियों की संख्या 47 है, जिसे पुनर्गठन के बाद बढ़ाकर 60 किए जाने की संभावना है। सरकार में अभी कोई दलित चेहरा नहीं है, ऐसे में संभावना है कि किसी दलित चेहरे को मंत्रीमंडल में जगह दी जा सकती है। इसके अलावा यादव चेहरे को भी मंत्रीमंडल में शामिल किया जा सकता है। बता दें कि साल 2017 के चुनावों में भाजपा ने 11 यादवों को टिकट दिया था, जिसमें से 9 ने जीत दर्ज की थी। एक यादव नेता गिरीश चंद यादव फिलहाल मंत्रीमंडल में हैं और यह संख्या बढ़ायी जा सकती है। वहीं अच्छा प्रदर्शन करने वाले कई राज्यमंत्रियों को प्रमोट कर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जा सकता है। दलितों और यादवो को मंत्री बनाकर यूपी सरकार सपा और बसपा के गठबंधन की काट खोजने की कोशिश कर रही है।

 

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