बलिया नगर पालिका का ये समीकरण बता देगा कौन बनने जा रहा चेयरमैन?

शहर की सरकार की लड़ाई मुहाने पर है. उत्तर प्रदेश की सभी पॉलिटिकल पार्टियां अपना कमर कस चुकी हैं. सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आज ही राजधानी लखनऊ में निकाय चुनाव को लेकर बड़ी बैठक की है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने संगठन की बैठक ली. जहां निकाय चुनाव में उम्मीदवारों, चुनाव प्रचार और जीत को लेकर मंथन हुआ. हर ज़िले के हिसाब से चर्चा हुई. तो आज के इस अंक में हम बात करेंगे बलिया नगर पालिका परिषद के चुनाव, उसके इतिहास और समीकरणों को लेकर.

बलिया नगर पालिका में वैश्य समाज का वर्चस्व माना जाता है. निकाय चुनाव के आंकड़े भी इसी ओर इशारा करते हैं. इस लिहाज से ये सवाल तो दिलचस्प हो ही गया है कि कौन से चेहरे होंगे जो चुनाव के मैदान में दिखेंगे? कौन से वो चेहरे होंगे जिनपर पार्टियां दांव लगाएंगी? बलिया में पिछड़ी जातियों का प्रभाव इसी बात से समझा सकता है कि 2017 के निकाय चुनाव में नगरपालिका बलिया के 25 में 14 वार्ड अलग-अलग वर्ग के लिए आरक्षित किए गए थे.

वैश्य समाज के पांडव:

अब तक बलिया में हुए निकाय चुनावों में 5 बार ऐसा मौका आया है जब वैश्य समाज का कोई उम्मीदवार चेयरमैन बना। 1953 में पहली बार नारायण राम चेयरमैन बने थे. नारायण राम 1957 तक चेयरमैन रहे. उसके बाद 1988 में जवाहर प्रसाद चेयरमैन बने. फिर लक्ष्मण गुप्ता 2000 में चेयरमैन बने. 2012 में चुनाव हुए साधना गुप्ता चेयरमैन बनीं. तो वहीं अंतिम चुनाव जब 2017 में हुए तो अजय कुमार समाजसेवी चेयरमैन बने.ये जाति समीकरण का प्रभाव ही है कि बलिया नगर पालिका में वैश्य समाज के उम्मीदवारों के जीतने की उम्मीद ज्यादा होती है. इस बार भी कई प्रत्याशी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं. हालांकि अब तक किसी पार्टी ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं. संभावित प्रत्याशी भी अंदरखाने तैयारी कर रहे हैं. लेकिन इंतजार चुनाव की अधिसूचना जारी होने का किया जा रहा है.

कौन हो सकता है उम्मीदवार?

बलिया के सियासी जानकार बताते हैं कि भाजपा की ओर से पूरे प्रदेश के लिए फाइनल प्लान तैयार नहीं है. कौन उम्मीदवार होगा? सिर्फ यही सवाल है जो तय होना बाकी है. दरअसल ये चुनाव सिर्फ निकाय चुनाव के लिहाज से नहीं देखा जा रहा है. बल्कि सब कुछ 2024 के नजरिए से तय होना है. किस तरह 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के संगठन को ताकत मिलेगी ये सबसे प्रमुख फैक्टर है.

हालांकि सियासी पंडितों का अनुमान ये है कि जायसवाल, सोनार, साहू, अग्रवाल जैसी जाति से ही प्रत्याशी बनाया जा सकता है. सभी पार्टियां इसी पैटर्न पर चलती हुई दिख सकती हैं. बता दें कि इसी महीने के दूसरे-तीसरे हफ्ते तक वोटर लिस्ट और बूथों की जानकारी सामने आ सकती है. वहीं कयासें लगाई जा रही हैं कि नवंबर महीने में निकाय चुनाव चुनाव हो सकता है.

Akash Kumar

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