बलिया पंचायत चुनाव में फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड कौन? सवालो के घेरे में बीजेपी की चुप्पी !

बलिया का चुनाव घोषणा से पहले और परिणाम के बाद तक चर्चा में रहा। अब सपा और भाजपा के आरोप-प्रत्यारोप से राजनैतिक गलियारों में ऊथल-पुथल मची हुई है। सपा कार्यकर्ताओं पर हुई पुलिसिया कार्रवाई से माहौल और गरमा गया। सपा, बीजेपी पर हार से बौखला कर बदला लेने की कार्रवाई का आरोप लगा चुकी है। जिले के नव निर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद चौधरी के पिता व पूर्व कैबिनेट मंत्री अंबिका चौधरी ने समाजवादी पार्टी कार्यालय पर प्रेसवार्ता आयोजित कर पुलिसिया कार्रवाई की बीजेपी की साजिश का हिस्सा बताया। उन्होंने मतदान केंद्र पर फर्जी वोटर्स की बात करते हुए सत्ता पक्ष और पुलिस पर सवाल दागे।

प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा चुनाव जीतने के लिए सत्तापक्ष ने हर हथकंडे अपनाए। मेरे खिलाफ 10 थानों में तहरीर दिलवाई। बांसडीह रोड थाने वादी के इनकार के बावजूद एफआईआर दर्ज करा दी गयी । लेकिन जब इसके बाद भी बीजेपी के नेताओ को अपनी हार नजर आने लगी तो सबने मिलकर अबतक के पंचायत के इतिहास में जो नही हो पाया था, वो करने की कोशिश करके काला इतिहास रच दिया गया।

पूर्वमंत्री ने दागे सवाल, कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान केंद्र में कैसे पहुंचे फर्जी मतदाता- पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में 7 फर्जी मतदाता पकड़े गए। जिस पर सवाल उठाते हुए चौधरी ने कहा कि मतदान केंद्र में सुरक्षा के चलते मीडिया कर्मी अंदर नहीं जा सकते थे। वहां 11 बजे से पहले ही मतदान करने फर्जी मतदाता कैसे पहुंच गए। हैरानी को बात तो यह है कि 7 फर्जी मतदाताओं में से 1 पुलिस अभिरक्षा से इतनी चौकस सुरक्षा को धत्ता बताते हुए फरार हो गया, यह निश्चित ही साजिश का हिस्सा है । यह जानना जरूरी है कि ऐसी साजिश रचने का मास्टरमाइंड कौन है?

यह भी जानने का प्रयास किया जाना चाहिये कि इनको अभेद्य सुरक्षा को धत्ता बताते हुए अंदर पहुंचाने वाले प्रशासनिक या पुलिस के कौन कौन लोग शामिल है उनके नाम का खुलासा बहुत जरूरी है । पूर्व मंत्री ने कहा कि हैरान करने वाली बात है कि 7 लोग फर्जी प्रमाण पत्र बनवाते है,आधार कार्ड बनवाते है, मतदान करने की कोशिश करते है ,बावजूद उनसे राज उगलवाने के उनको निजी मुचलके पर छोड़ दिया जाता है,यह आश्चर्यजनक है। फर्जी प्रमाण पत्र व फर्जी आधार कार्ड ये लोग अपने घर तो बनाये नही थे, फिर ऐसे लोगो से पूंछताछ करके इसके असली गुनाहगारों तक पहुंचना चाहिये था लेकिन इनको छोड़ दिया गया।

फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के लिये आईपीसी में धारा 467,468 है और इसको फर्जीवाड़े के लिये प्रस्तुत करने पर धारा 471 भी लग जाती है । ऐसे आरोपियों को सामान्य दफाओं में आरोपी बनाना, अपराध को न्यूनतर करना है जो बहुत बड़ा अपराध है। ऐसा करने वाले अधिकारी को सेवा से बर्खास्त भी किया जा सकता है। पूर्व मंत्री ने जो सवाल उठाए वो लाजमी भी है। आखिर मतकेंद्र पर सुरक्षा के बीच में फर्जी वोटर्स कैसे पहुंच गए? और इस पूरे मामले में बीजेपी की चुप्पी भी सवालो को जन्म दे रही है।

Rashi Srivastav

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