बलिया. बूढ़ा हाथ कांप रहा था। कलेजा सिसक रहा था। कोई होनी को कोस रहा था तो कोई समय को दोषी मान रहा था, लेकिन किसी के बस में कुछ नहीं था। अंततः खामोशी की चादर ओढ़ें माहौल में बुर्जुग बाबा ने अपने दो पोतों को मुखाग्नि दी। ऐसा नजारा देख न सिर्फ कुछ देर के लिए गंगा की लहरें थम गई, बल्कि आसमां भी शांत नजर आया।
गौरतलब हो कि बुधवार को गंगा नदी में नहाते समय डूबने से मझौवां गांव निवासी नीरज पुत्र लल्लन गोंड व आशीष पुत्र ददन गोंड की मौत हो गयी थी। दोनों चचेरे भाई थे। अफसोस, आशीष के पिता ददन गोंड़ व मां रिंकी देवी गुजरात में है और लॉकडाउन की वजह से वे अपने जिगर के टुकड़े का अंतिम दीदार भी नहीं कर सकें। आशीष अपनी तीन बहनों में इकलौता भाई था। वही, नीरज के पिता लल्लन गोंड राजस्थान के इमराना में फंसे है। घर पर नीरज की रेनू देवी है। ऐसे में आशीष के माता-पिता व नीरज के पिता से दूरभाष पर बात करने के बाद दोनों चचेरे भाइयों का अंतिम संस्कार गंगा नदी के पचरुखिया घाट पर किया गया, जहां मुखाग्नि बूढ़े बाबा श्रीराम गोंड ने दी। यह दृश्य जो भी देखा उसका गला रूंध गया और आंखें बरस पड़ी। दो पोतो को खो चुके वृद्ध श्रीराम गोंड की आंखें पथराई हुई थी।
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