2002 से 2005 के बीच बलिया में हुए खाद्दान्न घोटाले के आरोपियों पर पुलिस लगातार शिकंजा कस रही है।
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के चर्चित खाद्दान्न घोटाले के मामले में इन दिनों ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां हो रही हैं। गत शनिवार यानी 18 सितंबर को आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (इओडब्ल्यू) ने इस मामले में आरोपित एक कोटेदार को गिरफ्तार किया है। इओडब्ल्यू की टीम ने वाराणसी के कचहरी चौराहे से पूर्व कोटेदार लल्लन गिरी को पकड़ा। 2002 से 2005 के बीच बलिया में हुए खाद्दान्न घोटाले के आरोपियों पर पुलिस लगातार शिकंजा कस रही है। बीते हफ्ते के बुधवार को इसी मामले में पुलिस ने पूर्व सहायक विकास अधिकारी (सहकारिता) धर्मदेव सिंह को भी गिरफ्तार किया था।
केन्द्र सरकार और राज्य सरकार ने मिलकर 2002 से 2005 के बीच बलिया में सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना चलाया था। इस योजना के तहत जिले में मिट्टी भराई, नाला निर्माण, खड़ंजा सड़क निर्माण, पटरी मरम्मत, पुलिया निर्माण जैसे काम कराए गए। इन कार्यों में जो भी मजदूर काम करते थे उन्हें मजदूरी में नगद पैसा और अनाज दिया जाता था। बलिया में 2002 से 2005 के बीच इस योजना में भयंकर गड़बड़ी देखने को मिली। काम करने वाले मजदूरों के नाम से फर्जी हस्ताक्षर करके और स्टांप लगाकर लाखों रुपए के घपले की बात सामने आई थी। इस योजना के तहत जो अनाज मजदूरों को दिया जाना चाहिए था उसे अधिकारियों और कोटेदारों ने मिलकर बाजार में बेच दिया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने घोटाले की जांच का जिम्मा आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन को सौंप दिया। आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन ने जब जांच शुरू की घपले की परतें खुलने लगीं। जांच के बाद सुखपुरा थाने में तत्कीलिन ब्लॉक विकास पदाधिकारी (BDO) रामफेर समेत अन्य कई अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज किया गया था। इस मामले में बलिया के 17 ब्लाकों के सभी कोटेदारों और कई अधिकारियों तथा कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज कराया गया। बलिया जिले के 14 अलग-अलग थानों में कुल 51 मुकदमे दर्ज किए गए। इन मुकदमों में लगभग छह हजार से ज्यादा लोगों को आरोपी बनाया गया।
बता दें कि बलिया में सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना में हुए इस घोटाले में लगभग तीस लाख की चपत लगाई गई थी। जांच में यह बात सामने आई थी कि 14 लाख 50 हजार रुपए के खाद्दान्न चोरी करके बाजार में बेचे गए थे। जबकि 15 लाख 80 हजार की नगद राशि का घोटाला हुआ था। हालांकि कई मीडिया रपटों में यह घोटाला पचास लाख लेकर एक करोड़ तक बताया जाता रहा है।
इओडब्ल्यू की टीम ने इसी मामले में पूर्व ब्लॉक प्रमुख समेत तीन अन्य आरोपितों को 2020 में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इओडब्ल्यू ने इन तीनों को वाराणसी के भोजूबीर से गिरफ्तार किया था। इओडब्ल्यू लगातार इस बड़ी खाद्दान्न घोटाले के आरोपितों पर शिकंजा कस रही है। गिरफ्तारियों का सिलसिला लगातार जारी है।
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