सात साल के बाद बेटा बाप के साथ तो सोए लेकिन माँ के साथ एक बिस्तर पर नहीं सो सकता है . बेटी माँ के साथ तो सोएगी लेकिन बाप के साथ नहीं सो सकती है इसी तरह जब बेटी 9 साल की हो जाए तो बाप पर यह एहतियात लाज़िम है की वह प्यार में एहतियात से काम लेवे , बेहतर यह है की उसकी बॉडी से अपनी बॉडी को दूर रखे प्यार करना हो तो सर पर हाथ रखे सर पर प्यार करे .
बाप बेटी के गाल और होंठ पर प्यार न करे 9 साल की बच्ची हो जाए तो ख़ास एहतियात करे ,और जब बालिग हो जाए फिर तो हरगिज़ इसकी इजाज़्ज़त नहीं है क्यों की मसला यह है की बाप बेटी को इस तरह प्यार करे खुदा न खस्ता बाप के दिल में शहवत पैदा हो गई तो बेटी की माँ बाप के लिए हराम हो गई .
शरियत में सेक्सुअल रिलेशन है वह एक वक़्त में एक औरत के साथ हो सकता है माँ के साथ हो गया तो बेटी के साथ नहीं हो सकता है बेटी से हो गया तो माँ से नहीं हो सकता , ऐसी ज़रा भी इजाज़त नहीं है की दोनों तरफ चल सके , जब तुम्हारा निकाह हुए और उस औरत के साथ सेक्सुअल रिलेशन हो गया तो उस औरत की बेटी तुम पर हराम हो गई . अब उस बेटी से क़यामत तक निकाह नहीं हो सकता है .
अगर सेक्सुअल रिलेशन नहीं हुए निकाह के बाद सेक्सुअल रिलेशन कायम होने से पहले तलाक हो गया तो उस औरत की बेटी जो कि पहले से हो या किसी और से निकाह करके जो बेटी हो उस बेटी से शादी हो सकती है . उसी तरह अगर दामाद का सास के साथ कोई सेक्सुअल रिलेशन हुए तो जो सास की बेटी है वह दामाद के लिए हराम हो जाएगी , इन रिश्तो में एहतियात की बहुत सख्त ज़रुरत है इस्लाम पाकीज़ा निज़ाम बनाना चाहता है ..आगे देखिये वीडियो
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