वाराणसी में खून के रिश्ते को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। जहां चार बेटों और एक बेटी ने मां की लाश को सिर्फ इसलिए चार माह 10 दिन तक घर में छिपाए रखा ताकि वह पेंशन ले सकें। इस घटना का खुलासा बुधवार को तब हुआ जब पड़ोसी को दुर्गंध महसूस हुई। .
पुलिस ने तीन बेटों को हिरासत में ले लिया है और लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दी है। मामला भेलूपुर क्षेत्र के कबीरनगर (दुर्गाकुंड) का है। यहां कस्टम विभाग में सुपरिटेंडेंट रहे दया प्रकाश अपने बेटों रवि, ज्योति, गिरीश, योगेश्वर, देवप्रकाश और एक अविवाहित बेटी विजय लक्ष्मी के साथ रहते थे। वर्ष 2000 में दयाप्रकाश के निधन के बाद उनकी 13 हजार रुपये पेंशन उनकी पत्नी अमरावती को मिलने लगी। इस साल 13 जनवरी को अमरावती की भी इलाज के दौरान मौत हो गई। बेटे शव को घर ले आए और तब से घर में छिपाए रखा था।
शव का परीक्षण करने वाले डॉक्टर पीयूष कुमार ने बताया कि मृत शरीर पर केमिकल का लेप लगाया जाता था। शरीर का रंग जगह-जगह से काला और लाल पड़ गया था।
बेटे आसपास के लोगों या किसी को भी घर के अंदर नहीं आने देते थे। दो दिन से घर से उठ रही दुर्गंध से परेशान पड़ोसी ने पुलिस को फोन कर दिया, इसके बाद ही पोल खुली।.
बेटों ने मां का अंतिम संस्कार न करने की साजिश पहले से ही रच ली थी। इसका संकेत घटनाक्रम से मिलता है। अमरावती की मौत की सूचना पर रिश्तेदारों के अलावा कॉलोनीवासी भी अंतिम संस्कार के लिए घर पहुंचे। शव को नहलाते वक्त बेटों ने सबको बताया कि शरीर में हरकत हो रही है,मां जिंदा हैं। लोगों को यह अटपटा लगा पर वे लौट गए। इसके बाद बेटों ने मां का शव घर के बाहरी कमरे में चौकी पर लिटा दिया। शव खराब न हो, इसलिए एसी भी लगा दिया गया था।
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