भाजपा से मुकाबला करने के लिए सपा और बसपा ने उत्तर प्रदेश में अगले लोकसभा चुनाव को लेकर आपस में हाथ मिला लिया था। यह गठबंधन एतिहासिक था क्योंकि एक अरसे के बाद दोनों पार्टियाँ अपने गिले शिकवे को भुलाकर आपस में गठबंधन किया था। लेकिन अखिलेश यादव और मायावती ने साथ आकर कांग्रेस को किनारे लगा दिया था।
हालाँकि सपा बसपा के गठबंधन से पहले ही कांग्रेस विपक्षी एकता पर जोर दे रही थी और भाजपा से मुकाबला करने के लिए हर तरह के समझौते करने को तैयार थी लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस को इस गठबंधन में शामिल नहीं किया। इसके बाद कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में अपनी हालत सुधारने के लिए प्रियंका गाँधी को उतारने का फैसला किया और उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी। इसके बाद कांग्रेस के दिन अब फिरते नज़र आ रहे हैं।
दरअसल प्रियंका गाँधी के आने के बाद से जनता के बीच कांग्रेस पार्टी की लोकप्रियता मे गज़ब का इजाफा देखा गया और इससे उम्मीद जगी कि कांग्रेस यहाँ पर खेल बिगाड़ सकती है। कांग्रेस के नेताओं का भी कहना था कि प्रियंका गाँधी के आने के बाद से पार्टी को तीस सीटें उत्तर प्रदेश में मिल सकती हैं। लेकिन अब सपा और बसपा के गठबंधन में कांग्रेस को भी शामिल होने का न्योता दिया गया है।
बताया जा रहा है कि गठबंधन की तरफ से कांग्रेस पार्टी को दस सीटों पर चुनाव लड़ने के ऑफर दिया गया है। कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव और मायावती एक भी वोट जाया नहीं होने देना चाहते हैं जिससे की भाजपा को फायदा मिले। इसके बाद मंथन करने कांग्रेस को यह ऑफर दिया गया है। हालाँकि अब यह फैसला कांग्रेस को करना है कि क्या वह इतनी सीटों से संतुष्ट है या नहीं।
अभी कांग्रेस पार्टी की तरफ से इसे लेकर कोई बयान नहीं आया है। आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले प्रियका गाँधी ने पूर्व सपा नेता शिवपाल सिंह यादव से फोन पर बात की थी। इसके बाद कहा जा रहा था कि वह उनके साथ गठबंधन कर सकती हैं।
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