बलिया: साल दर साल क्यों कम होते जा रहे हैं बोर्ड के परीक्षार्थी? ये है बड़ी वजह!

गुरुवार यानी आज से उत्तर प्रदेश बोर्ड की परीक्षा शुरू हो गई है। कक्षा-10 और कक्षा-12 के लाखों छात्र-छात्राएं परीक्षा देने पहुंच रहे हैं। यही परीक्षा काफी हद तक छात्र-छात्राओं का भविष्य या कहें कि भविष्य की दिशा तय करेगी। बलिया ज़िले में भी बोर्ड की परीक्षा का आगाज हो चुका है। लेकिन इन सब के बीच एक हैरान करने वाला आंकड़ा सामने आया है। साल दर साल बोर्ड परीक्षा में शिरकत करने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या घटती नजर आ रही है। पिछले 4 सालों में 10वीं और 12वीं के परीक्षार्थियों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई है।

बात करते हैं साल 2018 से बोर्ड परीक्षा देने वाले बच्चों की। साल 2018 में कक्षा-10 की बोर्ड परीक्षा में लगभग 1 लाख 17 हजार परीक्षार्थियों ने हिस्सा लिया। तो 12वीं की परीक्षा में लगभग 93 हजार परीक्षार्थियों ने शिरकत की। इसके अगले ही वर्ष जब 10वीं और 12वीं की परीक्षा हुई तो संख्या धड़ाम हो चुकी थी। 2019 में लगभग 86 हजार परीक्षार्थियों ने 10वीं की परीक्षा दी। तो 12वीं की परीक्षा में 75 हजार 5 सौ परीक्षार्थियों ने प्रतिभाग किया। इस लिहाज से 10वीं में लगभग 20 हजार से ज्यादा बच्चे कम हुए। तो 12वीं में लगभग 17 हजार कम छात्रों ने परीक्षा दिया।

कोरोना काल में यानी 2020 में बलिया ज़िले में 10वीं में करीब 82 हजार परीक्षार्थी थे। तो 12वीं में 77 हजार परीक्षार्थी थे। यानी 2019 की तुलना में यहां भी 10वीं में छात्रों की संख्या में गिरावट देखने को मिली। हालांकि साल 2021 में बोर्ड परीक्षार्थियों की संख्या में मामूली बढोतरी भी देखने को मिली। 2021 में एक तरफ 10वीं में 84 हजार छात्रों का नाम रहा। तो 12वीं में लगभग 79 परीक्षार्थियों का नाम था।

अब बात इस साल यानी 2022 की कर लेते हैं। इस साल 10वीं में छात्रों की संख्या तो कम हुई ही है लेकिन 12वीं के परीक्षार्थियों की संख्या एकदम जमीन पर आ चुकी है। बलिया ज़िले में अबकी बार 10वीं में करीब 76 हजार बच्चे परीक्षा दे रहे हैं। तो वहीं 12वीं की बोर्ड परीक्षा में लगभग 65 परीक्षार्थी हिस्सा ले रहे हैं। देखा जाए तो 2018 के मुकाबले 2022 में 12वीं के परीक्षार्थियों की संख्या में लगभग 30 हजार की कमी हुई है।

नकल पर रोक बनी वजह: बोर्ड परीक्षाओं में नकल और फर्जीवाड़े के लिए बलिया कुख्यात है। एक वक्त था कि बलिया में नकल गैंग का खेल जोर-शोर से चला करता था। लेकिन पिछले कुछ सालों में इस नकलची गैंग पर प्रशासन ने लगातार नकेल कसा है। प्राइवेट से पास होने यानी सिर्फ एडमिशन लेकर डिग्री हासिल करने वाली परंपरा पर भी लगभग रोक लग चुकी है। ऐसी घटनाएं पहले अक्सर सामने आया करती थीं कि परीक्षार्थी कोई दूसरा है और परीक्षा में बैठा कोई और है। लेकिन ये फर्जीवाड़े लगभग शून्य हो चुके हैं।

माना जा रहा है कि नकल और प्राइवेट वाला खेल बंद होने की वजह से परीक्षार्थियों की संख्या में कमी देखने को मिल रही है। पहले बड़ी संख्या में बाहरी ज़िलों के लोग बलिया से फॉर्म भरकर बोर्ड की परीक्षा दिया करते थे। इस उम्मीद में कि बलिया से नकल के दम पर परीक्षा पास करना आसान था। लेकिन अब ये उम्मीद की किरण गायब हो चुकी है।

Akash Kumar

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