बलिया डेस्क : केंद्र सरकार के कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ किसानों का आंदोलन 25वें दिन भी जारी है. कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े किसान कड़ाके की ठंड में दिल्ली के बॉर्डर पर डटे हुए हैं. आंदोलन में मारे गए किसानों को रविवार को सिंघू बॉर्डर समेत अन्य जगहों पर श्रद्धांजलि दी जा रही है. इसी क्रम में बलिया शहर के शहीद पार्क में आम लोगों की तरफ से उनको श्रद्धांजलि अर्पित की गई गई.
किसान सभा (एआईकेएस) ने कल दावा किया कि 26 नवंबर से जारी विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले 33 किसानों की मौत दुर्घटनाओं, बीमारी और ठंड के मौसम की वजह से हुई है. जान गंवाने वाले किसानों को श्रद्धांजलि देने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में ”श्रद्धांजलि दिवस” मनाया जाएगा.
बलिया में सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि तीनो कृषि कानूनों के कारण देश भर के किसान कार्पोरेट घरानों से क़र्ज़ लेकर जिसपर ब्याज भी देना पड़ेगा, अपने ज़मीनों को उनके हाथों गिरवी रखना पड़ेगा क्योंकि जब पूंजीपति किसान को बीज, खाद और सिचाई तथा कृषि उपकरण वही देंगे. दूसरा मंडी व्यवस्ता भी समाप्त हो जायेगी,इसलिए किसान मांग कर रहे हैं कि एम.एस.पी को गारंटी दर्ज़ा दिया जाए.
इस काले कानून से जमाखोरों व कालाबाजारी को छूट दे दी गई है. अब राशन की दुकाने समाप्त हो जायेगी और गरीब भूखे मरेंगे. शहीद पार्क में हुई इस सभा की अध्यक्षता परमात्मा नन्द राय व संचालन तेज़ नारायण ने किया.इस कार्यक्रम में राजशेखर, लक्ष्मण यादव, अमरेंदर, कन्हिया प्रसाद, राम कृषण, विजय शंकर, इकबाल हुसैन, रविन्द्र सिंह, संतोष सिंह, अतहर, मिथलेस, सरदार जीत सिंह, आदि लोग उपस्थित रहे.
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