युवाओं की बढ़ती बेचैनी पर बलिया के इस विधायक ने लिखा लेख, सभी को पढ़ना चाहिए !

बलिया डेस्क : एक जन प्रतिनिधि और इस देश का नागरिक होने के नाते मैं हमेशा यही कामना करता रहा हूं कि मेरे विधानसभा क्षेत्र , मेरे जनपद , मेरे प्रदेश और इस देश का हर नागरिक अपनी योग्यता के अनुसार अपने काम /रोजगार में जुटा रहे । रोज़गार ही इंसान को समझदार और समृद्ध बनाता है और सोच से समृद्ध इंसान ही अपने देश की असल ताकत होता है । लेकिन आज जो देश की ये स्थिति देख रहा हूं इसने मेरे मन को व्याकुल कर दिया है।

देश में रोज़गार के हालात पहले ही कुछ ठीक नहीं लग रहे थे कि ऊपर से इस कोरोना महामारी ने  स्थिति  और बदहाल कर दी । शहरों के मुकाबले गांवों के हाल ज़्यादा बुरे हैं । इनकी ज़्यादा चिंता हो रही है । एक कमाने वाला अपने कंधों पर पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी लेकर घर से मीलों दूर जाता है, खून पसीना एक करता है तब जा कर कहीं उसका घर चला पाता है । लेकिन ऐसे हालत में ये लोग क्या करेंगे ? कैसे चलेगा इनका परिवार ?

प्राइवेट रिसर्च ग्रुप सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी के अनुसार ग्रामीण भारत में बेरोजगारी दर 25.09% हो गई है। वहीं शहरों में ये दर 22.72 फीसदी है । पिछले एक साल में 1.3 लाख से ज़्यादा लोगों ने बेरोजगारी और गरीबी के कारण आत्महत्या की है । इस रिपोर्ट के अनुसार लगभग हर एक घंटे में एक व्यक्ति इन कारणों से आत्महत्या कर रहा है । इससे भी ज्यादे युवाओं की चिंता ज़्यादा हो रही है ।

CMIE की रिपोर्ट ये बताती है कि केवल अप्रैल महीने में 20 से 30 साल के 27 मिलियन युवाओं की नौकरी छूट गई । युवा बहुत ही भावुक होते हैं । सही गलत का फैसला बिना देर किए ले लेते हैं । इस उम्र में टूटने के बाद फिर दोबारा खड़े हो पाने की हिम्मत कहां बचती है । बहुत कठिन वक्त है इनके लिए । अगर आप मेरी बात पे यकीन करें तो सच कह रहा हूँ, ये चिंताएं कई बार बहुत ज़्यादा बेचैन कर देती हैं ।

हम अपने गांवों को खुशहाल देखने का सपना देखा करता हूँ , हम सोचा करते हैं कि यहां का हर युवा दुनिया के सामने अपनी काबिलियत दिखाएगा मगर ऐसी स्थिति में अब सारे सपने जैसे धीरे धीरे टूटते नज़र आ रहे हैं । ज़रूरी है कि सरकार इस मामले को प्राथमिकता दे । सरकार को मुख्य रूप से ध्यान इधर आकर्षित करना चाहिये । अगर ऐसा ना हुआ तो देश, खास कर ग्रामीण भारत की स्थिति और बिगड़ती ही जाएगी । इस समय देश का सबसे अहम मुद्दा रोज़गार होना चाहिए ।

मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि सब मिला के इन गम्भीर समस्याओं पर मंथन करने की जरूरत है ।हमारी इस भवना को किसी को अन्यथा नही लेना चाहिए , मैने जैसा महसूस किया उसे सरकार के सामने एक आग्रह के रूप में ये लिखा हूँ। क्यों कि आज के समय मे हर व्यक्ति हर बात को राजनीति से जोड़ के देखता है कि लिखने वाला कौन है, क्या ये किसी पार्टी से तो सम्बन्ध तो नही रखते?

तमाम तरह के कमेंट्स लोग करने लगते हैं, जबकि ऐसा नही होना चाहिए बल्कि लिखने वाले कि बात सुझाव देने वाले कि बातों पर सकारात्क सोच ले के काम करना चाहिए। फिर भी अगर मेरा सुझाव किसी को अच्छा न लगा हो तो उनसे मैं क्षमा भी चाहूंगा।

इस लेख को  रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह के फेसबुक पेज से लिया गया  हैं 

बलिया ख़बर

Recent Posts

आजाद अधिकार सेना ने ओम प्रकाश को सौंपी बलिया जिलाध्यक्ष की कमान

आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने क्षेत्र के…

4 days ago

जमुना राम मेमोरियल स्कूल में धूमधाम से मना 80वां स्वतंत्रता दिवस, बच्चों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

बलिया। जमुना राम मेमोरियल स्कूल, मानपुर चितबड़ागांव में 15 अगस्त को 80वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास,…

1 week ago

सीबीएसई ईस्ट जोन हैंडबॉल में बलिया का जलवा, जमुना राम मेमोरियल स्कूल बना उपविजेता

सीबीएसई ईस्ट जोन हैंडबॉल प्रतियोगिता 2026-27 में बलिया की जमुना राम मेमोरियल स्कूल, चितबड़ागांव की…

2 weeks ago

बलिया में विनोद राय की दसवीं पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब, दिग्गज नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

बलिया के नरही थाना गोलीकांड के शहीद विनोद राय की दसवीं पुण्यतिथि पर बुधवार को नरही…

2 weeks ago

बलिया का बढ़ा मान! जमुना राम मेमोरियल स्कूल सीबीएसई ईस्ट जोन हैंडबॉल के फाइनल में

मिर्जापुर। सनबीम एकेडमी नॉलेज पार्क, मिर्जापुर में आयोजित सीबीएसई ईस्ट जोन हैंडबॉल प्रतियोगिता 2026-27 में…

2 weeks ago

तीन बार के विधायक उमाशंकर सिंह नहीं रहे, बलिया की राजनीति ने खोया अपना सबसे बड़ा जननेता

बलिया। रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक रहे और बहुजन समाज पार्टी (बसपा)…

3 weeks ago