बलिया- प्राइवेट टीचर्स पर कहर बनकर टूटा लॉकडाउन, नहीं मिली सैलरी, भुखमरी का ख़तरा

बलिया डेस्क : कोरोना लॉकडाउन मज़दूरों – कामगारों पर ही नहीं बल्कि प्राइवेट टीचर्स पर भी कहर बनकर टूटा है। इसके चलते कई प्राइवेट टीचर्स को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है, तो कई को तनख्वाह न मिलने के कारण आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ रहा है।

बलिया में कई ऐसे प्राइवेट टीचर्स हैं, जिन्हें फरवरी महीने से ही स्कूल द्वारा तनख्वाह नहीं दी जा रही, जिसके चलते वो गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। हद ये है कि अब इन टीचर्स के परिवार को भुखमरी का ख़तरा सताने लगा है। प्राइवेट टीचर्स की इन्हीं समस्याओं के सिलसिले में जिलाधिकारी श्री हरीप्रताप शाही और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा गया है।

ये पत्र बांसडीह के निजी विद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक मोर्चा और आवाज-ए-हिंद के तत्वावधान में उप जिलाधिकारी दुष्यंत कुमार मौर्य के माध्यम से लिखा गया है। जिसमें मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी से छह सूत्रीय मांगे की गई हैं। इस दौरान मोर्चा के संयोजक बबलू पांडेय ने सरकार और प्रशासन पर प्राइवेट टीचर्स की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि प्राइवेट टीचर्स पर आए आर्थिक संकट पर सरकार और प्रशासन का ध्यान बिल्कुल नहीं है। हम सभी गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। वहीं संगठन के सचिव माइकल भारद्वाज ने कहा कि हम लोग जहां कार्यरत हैं। वहां से तनख्वाह विगत फरवरी माह से ही नहीं मिल रही है।

जिससे हम लोगों का परिवार भुखमरी के कगार पर आ गया है। संगठन के ही एक और सदस्य सुजीत सिंह ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि निजी विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्रबंधकों को शिक्षकों और कर्मचारियों का कोरोना के बहाने शोषण करने का सुनहरा मौका मिल गया है। वहीं आवाज-ए-हिन्द के संस्थापक सुशांत राज भारत ने कहा कि निजी विद्यालयों के द्वारा शिक्षकों के साथ हो रहा अन्याय बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस लड़ाई को और संगठित कर शिक्षकों की आवाज को सरकार तक पहुंचाया जाएगा।।

उन्होंने अपनी मांगें रखते हुए कहा कि सभी निजी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों का बकाया वेतन 15 दिन के अंदर भुगतान कराया जाए। दसवीं, बारहवीं के कोचिंग सेंटरों को एक निश्चित नियमावली के तहत शुरू करने का आदेश दिया जाए, ताकि बच्चों को शिक्षा भी मिले और हम सभी का पेट भी पलता रहे।

भारत ने आगे कहा कि टीचर्स का न्यूनतम वेतन तय किया जाए, ताकि निजी विद्यालयों के द्वारा शिक्षकों का शोषण न हो सके। जून महीने का वेतन भी सभी कर्मचारियों को दिया जाए। इसके साथ ही टीचर्स को स्वास्थ्य बीमा की भी सुविधा प्रदान की जाए।

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