बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के एक आदेश के खिलाफ बंगाल की भाजपा इकाई ने सुप्रीमकोर्ट में अर्जी दायर की थी जिसे सुप्रीमकोर्ट ने रिजेक्ट कर दिया है आपको बता दें कि बंगाल में भाजपा और ममता बनर्जी के बीच चल रहा विवाद किसी से छिपा नहीं है जहाँ ममता इस समय राज्य की सीएम हैं उनकी प्रसिद्धि बंगाल में अपनी चरम पर है वही भाजपा से उनका आये दिन कोई न कोई विवाद होता रहता है जिसमे अभी हाल में सीबीआई का मामला बहुत गरम हुआ था और इस मुद्दे पर जमकर राजनीति हुई थी लेकिन मामला धीरे-धीरे ठंडा हो गया.
उसके बाद अब बंगाल की भाजपा इकाई ने ममता के एक आदेश के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में अर्ज़ी लगायी थी जिसे सुप्रीमकोर्ट ने रिजेक्ट कर दिया दरअसल मामला ये है कि अब लोकसभा चुनाव आने वाले हैं और इसके लिए सभी पार्टियों ने अपनी कमर कस ली है लेकिन ममता सरकार ने इसी बीच ये आदेश दे दिया कि मार्च में बच्चों की परीक्षा के मद्देनज़र लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं होगा.
अब इस आदेश से ज़ाहिर है कि चुनाव प्रचार पर सीधा असर पड़ेगा और सभी पार्टियों को बहुत मेहनत करनी पड़ेगी इसी बात को देखते हुए बंगाल की भाजपा इकाई ने सुप्रीमकोर्ट में एक अर्जी डाली गयी थी जिसमे कहा गया था कि ये बैन इसलिए लगाया गया है कि आने वाले चुनाव में भाजपा अपना चुनाव प्रचार न कर सके और चुनाव के दौरान विशेषकर आम चुनाव के दौरान लागू की गयी अधिसूचना पर्यावरण कानून के वैध दायरे से बाहर है.
आपको बता दें कि भाजपा का ये भी कहना था कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तय सीमा तक लाउडस्पीकर बजाने की इजाज़त देता है लेकिन राज्य सरकार इसकी भी इजाज़त नहीं दे रही है इस तरह की रोक एक सोची समझी रणनीति है जिससे भाजपा चुनाव प्रचार ना कर सके लेकिन भाजपा की इस याचिका को सुप्रीमकोर्ट ने ये कहकर ख़ारिज कर दिया कि चुनावी रैलियों से ज़्यादा बच्चों की पढ़ाई ज़रूरी है.
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