उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। सुनवाई को लेकर प्रदेश सरकार ने तैयारियां पूरी कर ली है। प्रदेश सरकार का पक्ष रखने के लिए प्रमुख सचिव नगर विकास के साथ अन्य अधिकारियों की टीम नई दिल्ली में पहले से मौजूद हैं।
बता दें कि राज्य सरकार ने निकाय चुनाव में पिछड़ों का आरक्षण तय करने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया था। इस आयोग की रिपोर्ट के सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिस किया। इसी रिपोर्ट के आधार पर सुनवाई होनी है।
आयोग ने रिपोर्ट के साथ आरक्षण प्रक्रिया को पुख्ता बनाने के लिए कानून में बदलाव की भी सिफारिश की है। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर अगर निर्णय आया तो सीटों के आरक्षण में बड़ा उलट फेर होगा। मेयर से लेकर अध्यक्ष पद की सीटों पर बदलाव हो सकता है। कई सीटें ओबीसी आरक्षित हो सकती हैं। ऐसे में सामान्य जाति के उम्मीदवारों को निराशा हाथ लग सकती है।
आज अनुमति मिल गई तो अप्रैल के अंत तक हो सकते हैं निकाय चुनाव-
आज सुनवाई में नगर विकास विभाग चुनाव कराने की अनुमति मांगेगा। अगर सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दे दी तो मेयर और अध्यक्ष की सीटों के आरक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। पिछड़े वर्ग को पूरा 27 फीसदी आरक्षण मिलेगा और प्रदेश में अप्रैल के अंत तक निकाय चुनाव हो सकते हैं।
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