छोटी उम्र में पिता को खोया, छोटी उम्र में काम करना शुरु किया, राह में कई मुसीबतें आई लेकिन हार नहीं मानी और अपनी लगन व मेहनत के दम पर बन गए इंडस्ट्री के दिग्गज मेकअपमैन। ये कहानी बलिया के किररिरापुर ब्लॉक के गांव उधरन के रहने वाले सुभाष सिंह की है। जिन्होंने साबित कर दिखाया कि अगर जज्बा हो तो हर मुकाम हासिल किया जा सकता है।
बलिया के रहने वाले सुभाष की कहानी संघर्षों के धागे से बुनी है। जब चार साल के थे, तो पिता की मौत हो गई। पूरी परिवार बिखर गया लेकिन मां ने हिम्मत नहीं हारी। गांव में जमीन थी, लेकिन पिता के भाईयों ने सुभाष व उसके परिवार को इतना परेशान किया, कि सभी जमीन बेचकर गांव से चले गए।
सुभाष बताते हैं कि बलिया से हम मुंबई आ गए। बांद्रा के भारत नगर में रहने लगे। पिता की मौत के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होती चली गई तो सुभाष ने पढ़ाई के साथ दूसरों के घरों में जाकर कपड़े और बर्तन साफ करने का शुरु कर दिया। शआम को वह बांद्रा के लिंकिग रोड पर जूते चप्पल की दुकान पर काम करता था। इसी बीच सुभाष की बहन चंदा ने दिलीप कुमार और सायरा बोने के पर्सन असिस्टेंट कम ड्राइवर अहमद से शादी कर ली।
सुभाष बताते हैं कि लिंकिंग रोड से अभिनेता दिलीप कुमार का पाली हिल बंगला नजदीक था तो मैं कभी कभी वहां खाना खाने चला जाया करता था। बड़े आदमियों का बड़प्पन कैसा होता है, ये मैंने पहली बार दिलीप कुमार में ही देखा।’ अहमद भाई का साला होने के चलते दिलीप साहब सुभाष को दुलार करते, सुभाष भी स्कूल न जाकर दिलीप साब के बंगले में जाते तो कभी उनकी गाड़ी में बैठकर शूटिंग देखने चले जाते।
लखनऊ से लौटने के बाद सुभाष को पंढरी दादा के सहायक के रूप में धारावाहिक ‘चुनौती’ में काम करने का मौका मिला। पंढरी दादा ऐसे मेकअप आर्टिस्ट रहे जिन्होंने अपनी कला किसी को कभी नहीं सिखाई। सुभाष ने उनका ‘एकलव्य’ बनने की ठान ली। घर पर मम्मी और दीदी का मेकअप करना शुरू किया। सुभाष बताते हैं कि मेरे दिमाग में हमेशा पंढरी दादा का काम रहता। पूरी अलमारी पर मैंने श्रीदेवी और रेखा की फोटो में से उनके होंठ और आंखें काटकर चिपका ली। बस उन्हीं को देख देखकर मैं मेकअप सीख गया।
सुभाष को सबसे पहले उपासना सिंह के पर्सनल मेकअप मैन का काम मिला। फिर डिंपल कपाड़िया ने उन्हें 40 हजार महीने के वेतन पर अपने पास रख लिया। इस दौरान उन्होंने ट्विंकल, रिंकी और सनी देओल का भी मेकअप किया। इसके बाद निर्देशक राव कंवर ने उन्हें अपनी फिल्म में आने वाली हर हिरोइन के मेकअप करने का काम दे दिया। वहीं से सुभाष ने जूही चावला, प्रियंका चोपड़ा, लारा दत्ता, दिया मिर्जा, जैकलीन फर्नाडिस जैसी एक्ट्रेस के मेकअप किए।
बाद में वह 13 साल तक कैटरीना कैफ के पर्सनल मेकअप आर्टिस्ट के तौर पर काम किया। सुभाष अपने संघर्ष भरे दिन को याद करते हुए कहते हैं कि पहले मुझे 50 दिन के 2 हजार मिलते थे, लेकिन आखिर तक मैंने 12 से 15 लाख महीने कमाना शुरु कर दिया। सुभाष ने अब मेकअप आर्टिस्ट के काम से रिटायरमेंट ले लिया है। वह अब फिल्में बना रहे हैं। उन्होंने एक पंजाबी फिल्म ‘इक जिंद इक जान’ बतौर सह निर्माता बनाई। फिर जूही चावला और शबाना आजमी की फिल्म ‘चॉक एन डस्टर’ में भी सह निर्माता रहे। अब वह बतौर निर्माता मेरी तीन फिल्मों ‘एलिस इन तालिबान’, ‘ट्रेन यूक्रेन’ और ‘मवान’ पर काम कर रहे हैं।
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