समाधान दिवस पर समाधान तो नहीं हो रहा, बल्कि और उलझ जा रहा है मामला

बलिया: समस्याओं का त्वरित निस्तारण हो, इसलिए शासन ने थानों में समाधान दिवस की स्थापना की है. लेकिन जनपद में इसका परिणाम बेहद निराशजनक है. महिला थाना को छोड़ दिया जाय जनपद के तीन कोतवाली सहित 22 थानों में जनवरी से लेकर फरवरी माह तक आयोजित समाधान दिवस में कुल 5366 मामलों में 783 मामलों का ही समाधान हो सका है. जबकि 4583 मामले अभी भी टेबल टू टेबल चक्कर काट रहे है.

ऐसे में समाधान दिवस यहां बेमतलब सिद्ध हो रहा है. जनपद में अलग-अलग कोतवाली व थानों में जनवरी 2019 में कुल 666, जिसमें सिर्फ 36 मामलों का निस्तारण, फरवरी में कुल 513 मामलों में सिर्फ 56 मामलों का हुआ निस्तारण. इसी क्रम में मार्च में कुल 523 मामलों में सिर्फ 54 मामलों का ही निस्तारण हो सका. इसी प्रकार अप्रैल में 485 मामलों में सिर्फ 39 मामलों का, मई में प्रस्तुत कुल 671 मामलों में 61 मामलों का निस्तारण, जून में 713 मामलों में 73, जुलाई में 406 प्रस्तुत

मामलों में 26 मामलों का निस्तारण, अगस्त में कुल 413 मामलों में 49 मामलों का ही हुआ निस्तारण, सितंबर में प्रस्तुत कुल 453 मामलों में 69, अक्टूबर माह में प्रस्तुत 329 मामलों में 38 मामलों का ही हो सका निस्तारण.नवंबर माह में 557 मामलों में 85 जबकि दिसंबर माह में प्रस्तुत 335 मामलों में सिर्फ 16 मामलों का ही हो सका निस्तारण. वहीँ रसड़ा कोतवाली का रिकार्ड बेहद खराब है, यहां जनवरी से लेकर अब तक हुए प्रस्तुत कुल 413 मामलों में सिर्फ 13 मामलों ही

समाधान हो सका है. ऐसे में इस बात का अंदाजा आप सहज ही लगा सकते हैं कि जनपद बलिया में थाना दिवस की स्थिति कैसी है. लगभग यही हाल जनपद के सभी थानों का है. वहीँ आवदेन प्रस्तुत की बात करें तो जनपद के हर कोतवाली एवं थानों में सबसे ज्यादा मामले में जमीन संबंधित है. जिन थानों में एसडीएम और तहसीलदार की उपस्थिति दर्ज हो जाती है, वहां स्थिति कुछ हद तक बेहतर है,

वरना लेखपाल, कानून गो समाधान दिवस के दिन केवल कोरम पूरा करने ही आते हैं. शहर कोतवाल विपिन सिंह ने बताया की जमीन संबंधित मामला सबसे ज्यादा समाधान दिवस में आता है. ऐसे में मामलों का समाधान एसडीएम और तहसीलदार के यहां से ही हो सकता है. अन्यथा इसे लेकर परिवार में आपसी विवाद के मामलों का निस्तारण कर दिया जाता है.

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