सर्दी का मौसम आते ही साईबेरियन पक्षियों का दल बलिया के जयप्रकाश नारायण सुरहाताल पक्षी विहार में आने लगा है। पूरे ठंड हर रोज सुबह लोगों के आकर्षण की केंद्र बनी रहेंगी साइबेरियन पक्षियां। लेकिन इन दिनों इन पक्षियों के जान पर संकट का कोहरा छाया हुआ है। साइबेरियन पक्षियों के आने के साथ ही इनके शिकारी भी सक्रिय हो गए हैं।
हर रोज सुबह बड़ी संख्या में साइबेरियन पक्षियों को शिकारी मार रहे हैं। इन्हें मारने के बाद खुलेतौर पर इनकी बिक्री भी हो रही है। जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार सुरहाताल में खुलेआम साइबेरियन पक्षियों के शिकार का अवैध धंधा जारी है। शिकारियों के मन में किसी का डर नहीं है। भय हो भी क्यों जब उनकी इस अमानवीय कृत्य के लिए उन्हें कोई सजा ही नहीं मिलती।
फिलहाल सुरहाताल में वीरानापन पसरा हुआ है। साइबेरियन पक्षियों की जमघट छोटी हो गई है। क्योंकि इन मेहमान चिड़ियों के आते ही शिकारी धोखे से जहर देकर मार दे रहे हैं। जिसकी वजह से सुरहाताल में साइबेरियन पक्षियों ने आना कम कर दिया है।
गौरतलब है कि हर साल सर्दी का मौसम शुरू होते ही साइबेरियन पक्षियों की कई प्रजाति आती हैं। इनकी संख्या हजारों में होती है। सुरहाताल में पूरा ठंड गुजारने के बाद फरवरी और मार्च के महीने में ये मेहमान साइबेरिया लौट जाती हैं। सुरहाताल में धान और जलीय कीड़े साइबेरियन पक्षियों का आहार होता है।
बताया जाता है कि साइबेरियन पक्षियों को मारने के लिए शिकारी उनके इन्हीं आहारों का इस्तेमाल करते हैं। शिकारी तितली पकड़ते हैं। उन्हें मारकर उनके अंदर जहर भर कर ताल के पानी में अलग-अलग जगहों पर रख देते हैं। साइबेरियन पक्षी जैसे ही इन तितलियों को अपना आहार समझकर खाती हैं अचेत हो जाती हैं यानी अधमरा हो जाती हैं। इसी फिराक में बैठे शिकारी अचेत पड़े पक्षियों को उठाते हैं और नमक का घोल पिलाकर जहर का असर खत्म करने की कोशिश करते हैं।
बाजार में मरे हुए साइबेरियन पक्षियों की कीमत कम है। जबकि जिंदा पक्षी ज्यादा भाव में बिकते हैं। सुरहाताल के आसपास ही इन्हें खरीदने वाले लोग मंडराते रहते हैं। ये सिलसिला नहीं रुका तो बहुत जल्द जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार सुरहाताल में एक भी साइबेरियन पक्षी नहीं दिखेगी।
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