बलिया डेस्क : बैरिया के इब्राहिमाबाद उपरवार इलाके के रहने वाले श्याम बाबू 2016 के पी सी एस एग्जाम में पास होकर चर्चा में आये थे. दिलचस्प बात यह थी कि श्याम बाबू उस वक़्त प्रयागराज में सिपासी के पद पर तैनात थे. पीसीएस एग्जाम में श्याम बाबू ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) का प्रमाण पत्र लगाया था.
लेकिन अमर उजाला की एक रिपोर्ट के मुताबिक पीसीएस अधिकारी के तौर पर उनकी नियुक्ति रद्द कर दी गयी है. दरअसल उनके द्वारा सौंपा गया प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया है जिसके बाद अपर मुख्य सचिव ने श्याम बाबू की नियुक्ति रद्द करने का आदेश जारी किया है. आपको बता दें कि श्याम बाबू संतकबीर नगर में उप जिलाधिकारी (परिवीक्षाधीन) के पद पर तैनात थे.
मिली जानकारी के मुताबिक़, श्याम बाबू ने एसटी का प्रमाण पत्र लगाकर खुद को गोंड जाति का बताया था. लेकिन इसके बाद मूल आदिवासी जनजाति कल्याण संस्था गोरखपुर के अध्यक्ष विजय बहादुर चौधरी की तरफ से अपील की गयी कि श्याम बाबू के जाति प्रमाण पत्र सत्यापन किया जाए. शिकायतकर्ता का कहना था कि श्याम बाबू ने अपने जाति प्रमाण पत्र में हेरा फेरी की है.
वहीँ अब बैरिया के तहसीलदार ने भी आख्या में श्याम बाबू को एसटी का नहीं माना है. वहीँ बलिया के डीएम और बांसडीह तहसीलदार ने उच्च न्यायालय में एक याचिका के जवाब में यह भी बताया है कि बलिया में यह जनजाति पाई ही नहीं जाती है.
वहीँ गाँव के लोगों का कहना है कि श्याम बाबू के पूर्वज खेती किसानी और भूजा वगैरा बेचने से लेकर मजदूरी का काम करते थे. लोगों का कहना है कि इनका गोंड जाति से कोई संबंध नहीं हैं. लोगों का कहना है कि यह पिछड़ी जाति से हैं.
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