बलिया। उत्तरप्रदेश में निकाय चुनाव पर लगी रोक के बाद अब ओबीसी आरक्षण को लेकर योगी सरकार ने सेवानिवृत्त जज राम अवतार सिंह के नेतृत्व में 5 सदस्यीय आयोग का गठन किया है। आयोग मानकों के आधार पर पिछड़े वर्गों की आबादी को लेकर सर्वे कर शासन को रिपोर्ट सौंपेगी। बता दें इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के फैसले के बाद 24 घंटे के भीतर यह निर्णय़ लिया गया।
इस आयोग का अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस राम अवतार सिंह को बनाया गया है. सदस्यों में चोब सिंह वर्मा, महेंद्र कुमार, संतोष विश्वकर्मा और ब्रजेश सोनी शामिल हैं. ये आयोग राज्यपाल की सहमति से 6 महीने के लिए गठित किया गया है, जो जल्द से जल्द सर्वे कर रिपोर्ट शासन को सौंपेगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मंगलवार को आदेश दिया था कि ओबीसी आरक्षण के लिए रैपिड टेस्ट का फार्मूला सही नहीं था। यूपी सरकार को डेडिकेटेड आयोग बनाकर पिछड़ा वर्ग आरक्षण की प्रक्रिया का पूरा पालन करना चाहिए था. अदालत ने सरकार से कहा था कि या तो वो ओबीसी आरक्षण वाली सीटों को सामान्य घोषित कर चुनाव कराए या पिछड़ा वर्ग आरक्षण के लिए आयोग गठित कर प्रक्रिया को 31 जनवरी तक पूरा करे।
अदालती फैसले के बाद सपा, बसपा जैसे विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला करना शुरू कर दिया। सपा और बसपा ने बीजेपी पर आरक्षण विरोधी और संविधान विरोधी होने की तोहमत तक मढ़ दी। हालांकि सरकार ने विपक्षी हमलों की धार को कुंद करने के लिए त्वरित निर्णय़ लेते हुए आयोग का गठन कर दिया।
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