उत्तरप्रदेश भ्रष्टाचार के दलदल में धंसा नजर आने लगा है। जहां देखो वहां भ्रष्टाचार। यूपी के गांवों-कस्बों में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो गई हैं कि इसे उखाड़ना मुश्किल है। सरकार भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लाख दावा करे लेकिन यूपी की जमीं पर भ्रष्टाचार का बीज पनप चुका है और अमरबेल लताओं की तरह फल-फूल रहा है। ताजा मामला सिकंदरपुर से सामने आया जहां ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नियुक्त प्रशासकों ने सरकारी धन का जमकर बंदरबांट किया है।
ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए सरकार फंड जारी करती है। लेकिन जानकारी सामने आई कि विकास कार्यों के नाम पर पंदह ब्लॉक के दो दर्जन से अधिक गांवों के प्रशासक 1 करोड़ 19 लाख रुपए हज़म कर गए। सरकार ने केवल निर्माणाधीन पंचायत भवन और सामुदायिक शौचालयों के लिए ही धनराशि निकालने की अनुमति दी गई थी। लेकिन पंदह ब्लॉक के अधिकतर ग्राम पंचायतों के प्रशासकों ने सरकार के नियमों को ताक पर रखकर नाली, खड़ंजा, इंटरलाकिंग, कायाकल्प, ह्यूम पाइप, हैंडपंप मरम्मत, हैंडपंप रिबोर व स्कूलों में बेंच व टाइल्स के नाम पर करीब 1.19 करोड़ की राशि आहरित कर दी।
प्रशासकों द्वारा किए गए करोड़ों के खेल के बारे में जानकारी मिली कि ज्यादातर धनराशि मार्च व अप्रैल माह में निकली गयी है। ग्रामीणों का कहना है कि उक्त समयावधि के दौरान कराए गए भुगतान की यदि निष्पक्ष जांच करा दी जाए तो ग्रामीण विकास तथा पंचायती विभाग के कई अधिकारियों के नाम सामने आ सकते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आचार संहिता के दौरान विकास कार्य व भुगतान अधिकारियों के बगैर संरक्षण के सम्भव नहीं है। कुल मिलाकर इस करोड़ों के खेल के शतरंज के कई खिलाड़ी हैं, जिनके नाम उजागर होने चाहिए।
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