जेल में मुख्तार अंसारी और ओमप्रकाश राजभर की मुलाकात से कैसे बदलेगी बलिया की हवा?

बुधवार को उत्तर प्रदेश के बांदा जेल में मुख्तार अंसारी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर की मुलाकात हुई। बांदा जेल में दोनों बड़े नेताओं की इस भेंट ने पूरे उत्तर प्रदेश की सियासत में गर्माहट बढ़ा दी है। लेकिन इस मेल-मिलाप से सबसे ज्यादा पूर्वांचल में चर्चाओं का बाजार तेज हो गया है। बलिया से बनारस तक मुख्तार अंसारी के साथ जेल में ओमप्रकाश राजभर की भेंट के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।

ओमप्रकाश राजभर ने बांदा जेल में मुख्तार अंसारी से मुलाकात करने के बाद कहा है कि “उनके साथ मेरे राजनीतिक रिश्ते पिछले 19 सालों से रहे हैं। मुख्तार अंसारी जहां से भी उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहेंगे मैं उनका समर्थन करूंगा। चाहे किसी भी सीट से वो चुनाव लड़ना चाहें हम अपनी टिकट पर उन्हें चुनाव लड़ाएंगे।”

ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा है कि “भारतीय जनता पार्टी के लोग मुख्तार अंसारी को माफिया कहते हैं लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार में एक-तिहाई लोग अपराधी हैं।” ओमप्रकाश राजभर ने इस भेंट के साथ ही प्रदेश की राजनीति में कई समीकरण उलट-पलट कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में दिलचस्पी लेने वाले लोग मुख्तार अंसारी की सियासी ताकत से बखूबी वाकिफ हैं।

गौरतलब है कि ओमप्रकाश राजभर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से हाथ मिला चुके हैं। सबसे पहले कुछ दिन पहले लखनऊ में अखिलेश यादव के साथ ओमप्रकाश राजभर की भेंट हुई। उसके बाद सुभासपा के स्थापना दिवस पर मऊ में अखिलेश यादव और ओमप्रकाश राजभर ने संयुक्त रैली भी की थी।

अब मुख्तार अंसारी से ओमप्रकाश राजभर मिलने बांदा जेल भी पहुंच गए। तो सवाल है कि क्या सपा के साथ ओमप्रकाश राजभर गठबंधन करते हुए मुख्तार अंसारी को अपने साथ लाने में कामयाब हो पाएंगे? अगर ऐसा होता है तो पूर्वांचल में इसका असर देखने को मिल सकता है। सपा-सुभासपा का गठजोड़ बलिया, गाजीपुर, मऊ, बनारस जैसे सीटों पर मुख्तार अंसारी के प्रभाव को भुनाने की कवायद करेगी।

मुख्तार अंसारी का गढ़ माना जाने वाला गाजीपुर बलिया का पड़ोसी जिला है। इस लिहाज से मुख्तार अंसारी का असर बलिया में देखने को मिलता है। सियासी टिप्पणीकारों का मानना है कि अगर ये तीकड़ी बनती है तो इसका फायदा सपा को मिल सकता है। सपा की स्थिति मजबूत ही होगी। ओमप्रकाश राजभर को अपने साथ लाकर सपा पहले ही बलिया के रसड़ा, बांसडीह और सिकंदरपुर जैसी सीटों का जातिगत समीकरण साध चुकी है। अब अगर मुख्तार अंसारी ओमप्रकाश राजभर के साथ आते हैं तो चुनावी ताकत में इजाफा देखने को मिल सकता है।

बहरहाल ओमप्रकाश राजभर और मुख्तार अंसारी की आज हुई मुलाकात से राजनीतिक शोर बढ़ चुकी है। लेकिन देखने वाली बात होगी कि क्या दोनों नेता चुनाव में साथ आते हैं? अगर साथ आते हैं तो चुनाव में इसका क्या असर दिखेगा? ये कुछ बड़े सवाल हैं जो आज नए सिरे से जन्म ले चुके हैं।

Akash Kumar

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