आपसी अंतर्कलह से जूझ रही है बलिया में समाजवादी पार्टी !

बलिया डेस्क : यूपी विधानसभा चुनावों में अभी लम्बा वक़्त है लेकिन बलिया समाजवादी पार्टी में बड़ी फूट पड़ गई. बीते दिनों समाजवादी पार्टी द्वारा निकाली जा रही परिवर्तन यात्रा रद्द किए जाने के बाद बलिया में पार्टी दो फाड़ होती नज़र आ रही है। पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि पार्टी के ज़िलाध्यक्ष राजमंगल ने विपक्षियों के साथ मिलकर जानबूझकर इस यात्रा को रद्द करवाने का काम किया।

पार्टी में शामिल कई नेताओं का कहना है कि यात्रा को एक साज़िश के तहत रद्द किया गया है और इस साज़िश में ज़िलाध्यक्ष राजमंगल की भी अहम भूमिका है। बता दें कि इस परिवर्तन यात्रा का नेतृत्व पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री नारद राय कर रहे थे। पार्टी में शामिल नारद राय के समर्थकों का कहना है कि राजमंगल राय को पसंद नहीं करते, इसी वजह से उन्होंने कार्यक्रम को रद्द करवाने के लिए लेटर जारी किया।

पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता राजकुमार पांडेय ने तो ज़िलाध्यक्ष पर नारद राय की हत्या की साज़िश रचने तक का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी गुटों ने ज़िलाध्यक्ष के साथ मिलकर पूर्व मंत्री की हत्या की साज़िश रची थी। इसी वजह से उन्होंने अचानक कार्यक्रम को रद्द किया, जिससे नारद राय को सदमा लगे और उनकी मौत हो जाए।
बता दें कि जिस दिन कार्यक्रम को रद्द किया गया, उसी दिन नारद राय की तबीयत अचानक बिगड़ गई।

जिसके बाद उन्हें लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। राजकुमार पांडेय के मुताबिक, नारद राय ने परिवर्तन यात्रा के आयोजन के लिए जी जान से मेहनत की थी। वो इसकी तैयारी में कई दिनों से जुटे थे। लेकिन जब अचानक ज़िलाध्यक्ष ने कार्यक्रम को रद्द कर दिया तो उनकी तबीयत बिगड़ गई।

हालांकि ज़िलाध्यक्ष राजमंगल ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि कार्यक्रम को कोरोना के चलते और प्रदेश नेतृत्व से मिले निर्देश के मुताबिक रद्द किया गया है। उन्होंने बताया कि कोरोना के कारण डीम ने इस कार्यक्रम की इजाज़त नहीं दी थी। ज़िलाध्यक्ष ने कहा कि मेरे लिए पार्टी का छोटा से बड़ा नेता एक समान है। हमें भी कार्यक्रम रद्द होने का दुख है।

नारद राय और राजमंगल के बीच कथित कलह के पीछे समाजवादी पार्टी के उस फरमान को भी वजह बताया जा रहा है, जिसमें कहा गया था कि संगठन के अहम पदों पर आसीन पदाधिकारी 2022 विधानसभा चुनाव में चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। यानी ज़िलाध्यक्ष सहित मंडलाध्यक्ष चुनाव नहीं लड़ेंगे। अब ये तो आने वाला समय बताएगा की ऊंट किस करवट बैठेगा ?

 

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