बलिया/ सलेमपुर : लोकसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ आने से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) फूंक – फूंक कर क़दम रख रही हैं. जिन सीटों पर 2014 में भाजपा ने मोदी लहर के सहारे कब्ज़ा जमाया था, उन सीटों पर दुबारा सत्ता में वापिस आने के लिए भाजपा अपने कई चेहरे बदल सकती है. भारतीय जनता पार्टी लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई है. सलेमपुर को लेकर भाजपा में मंथन चल रहा है , उसमें प्रत्याशियों का जातिगत गणित को देखते हुए इस बार मौजूदा सांसद का टिकट कटता नज़र आ रहा है. भाजपा यहाँ चेहरा बदल सकती है.
पार्टी सूत्रों से मिली रिपोर्ट के मुताबिक पांच सालों में मौजूदा सांसद का रिपोर्ट कार्ड काफी खराब रहा है, जिसमें सबसे ज्यादा शिकायतें जनता से दूरी बनाए रखने और सुनवाई न करने की रही हैं. इससे कहीं न कहीं पार्टी का प्रभाव भी कम हुआ. ऐसे में पार्टी नेतृत्व इस सीट से नया चेहरा मैदान में उतारने की रणनीति बना रहा है.
कौन होगा नया चेहरा : बलिया खबर को भाजपा सूत्रों से मिली जानकरी के मुताबिक अगर भाजपा इस सीट से चेहरा बदलती है तो पार्टी के ही पुराने नेता और पूर्व ब्लाक प्रमुख अक्षय लाल यादव का नाम सबसे ऊपर है . अक्षय लाल यादव भाजपा के काफी पुराने नेता माने जाते हैं.वह पार्टी के लिए कई अहम ज़िम्मेदारियां निभा चुके हैं. अपने जीवन की तकरीबन आधी उम्र सामाजिक कार्यों में समर्पित कर चुके अक्षय लाल को भी उम्मीद है कि पार्टी इस बार उनपर भरोसा करके उन्हें मैदान में उतार सकती है. एक अरसे से भाजपा के लिए काम करने वाले अक्षय लाल को इलाके में काफ़ी पसंद भी किया जाता है.
बता दें की अक्षय लाल की यादव- मुस्लिम समाज के साथ ही उनकी दलितों के साथ- साथ सर्व समाज मे भी अच्छी पैठ है. ऐसे में इस सीट पर उनकी दावेदारी मज़बूत नज़र आ रही है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा अक्षय लाल यादव को टिकट देकर यहां फिर से अपना कब्ज़ा बरकार रख पाएगी ?
सांसद रविन्द्र कुशवाहा का रिपोर्ट कार्ड : 2014 में सांसद रविंद्र कुशवाहा पहली बार लोकसभा पहुंचे हैं. वह फूड, कन्ज्यूमर एंड पब्लिक डिस्ट्रब्यूशन कमिटी की स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य हैं. जहां तक लोकसभा में सत्र के दौरान उनकी उपस्थिति का सवाल है तो उनकी उपस्थिति गुजरे साढ़े 4 साल के बुलाए गए सत्रों (8 जनवरी, 2019) में उनकी उपस्थिति का रिकॉर्ड 89 फीसदी है. इस दौरान 6 बार उनकी उपस्थिति 100 फीसदी रही, जबकि 6 अन्य सत्रों में उनकी उपस्थिति 90 फीसदी से ऊपर रही. उपस्थिति के मामले में उनका सबसे खराब प्रदर्शन 2018 के बजट सत्र में रहा जहां उनकी उपस्थिति 66 फीसदी रही.
हालांकि लोकसभा में उनकी सक्रियता खास नहीं रही है. उन्होंने कुल 19 बहस में हिस्सा लिया, जबकि बहस में शामिल होने के मामले में उनके राज्य का औसत 107.2 फीसदी है और राष्ट्रीय औसत 65.3 है. सवाल पूछने के मामले में भी वह राष्ट्रीय (285) और राज्य (193) औसत से काफी पीछे है. उन्होंने 86 सवाल पूछे हैं.
एक तरह से देखा जाए तो सलेमपुर लोकसभा सीट पर पिछले 30 सालों में समाजवादी पार्टी का दबदबा रहा है. बीजेपी तो पिछली बार मोदी लहर में यह सीट निकालने में कामयाब रही है. इस बार राज्य में सपा-बसपा एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं. ऐसे में बदले समीकरण में बीजेपी के लिए यह सीट निकाल पाना आसान नहीं दिख रहा. हालांकि पिछले चुनाव के आधार पर बीजेपी के विजयी उम्मीदवार को करीब 46 फीसदी वोट मिले थे जबकि बसपा को 18.7 और सपा को 19.68 फीसदी वोट हासिल हुए. दोनों के योग (38.38 फीसदी) भी बीजेपी उम्मीदवार को मिले वोट से काफी कम है. अगर पिछली सूरत बनी रही तो बीजेपी की राह आसान हो सकती है. देखना होगा कि 2019 के चुनाव में किस पार्टी का दबदबा सलेमपुर में कायम होता है.
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