इस्लाम एक ऐसा मज़हब है जिसमे दुनिया और क़यामत के दिन के बारे में एकदम साफ़ तौर पर बता दिया गया है मतलब दुनिया में किस तरह रहना है वो तरीका और जो शख्स दुनिया में इस्लाम के मुताबिक अमल न करे या इस्लाम के मुताबिक अमल करे उसके लिए क़यामत का दिन का कैसा होगा दोस्तों वैसे तो ये टॉपिक बहुत बड़ा है और इसमें बताने के लिए बहुत कुछ है लेकिन हम आपको क़यामत और आज़ाब के ताल्लुक से कुछ बात बताने जा रहे हैं अल्लाह के नबी सल्लाo ने इरशाद फ़रमाया कि क़यामत के दिन मुताकब्बिर लोग यानी जो लोग घमंड करते हैं.
उनको मैदान-ए-महशर में छोटी-छोटी चींटियों की मानिंद लाये जायेंगे उन्हें हर जगह ज़िल्लत ढांपे रहेगी फिर वो जहन्नम के ऐसे कैद खाने की तरफ हांके जायेंगे जिसका नाम बुलस है उसमे उन्हें भड़कती हुई आग उबलेगी वो उसमे जहान्नामियों के ज़ख्मों की पीप पीयेंगे जिसे तीनत अल-खबाल कहते हैं यानी सड़ी हुई बदबूदार कीचड़.जामिया तिरमिज़ी जिल्द 2, 381 हसन.
रसूल-अल्लाह सललाल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया ऊँट क़यामत के दिन अपने उन मालिकों के पास उससे ज़्यादा मोटे ताज़े हो कर आएँगे (जैसे दुनिया में थे) जिन्होने उनका हक़ अदा नही किया(यानी ज़कात नही दी) और इन्हें अपने खुरों से रोंदेंगे , बकरिया भी अपने मालिको के पास जिन्होने उनका हक़ नही दिया था पहले से ज़्यादा मोती ताज़ी हो कर आएँगी और उन्हें अपने खुरो से रोंदेंगी और अपने सींगो से मारेंगी रसूल-अल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया के उसका हक़ ये भी हैं के उससे पानी ही पर (यानी जहा वो चरागाह में चर रही हो) दोहा जाए.
आप सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया कोई शख्स क़यामत के दिन इस तरह ना आए के वो अपनी गर्दन पर एक ऐसी बकरी उठाए हुए हो जो चिल्ला रही हो और वो शख्स मुझसे कहे एह मुहम्मद सललाल्लाहू अलैही वसल्लम मुझे अज़ाब से बचा लीजिए मैं उससे जवाब दूँगा के तेरे लिए में कुछ नही कर सकता मेरा काम पंहुचाना था तो मेने पहुंचा दिया था , इस तरह कोई शख्स अपनी गर्दन पर ऊँट लिए हुए आये क़यामत के दिन ना आई के ऊँट चिल्ला रहा हो और वो खुद मुझसे फरयाद करें एह मुहम्मद सलअल्लाहू अलैही वसल्लम मुझे बचा लीजिए और मैं जवाब दूँगा के तेरे लिए मैं कुछ नही कर सकता मैंने तुझे जो अल्लाह सुबहानहु का हुकुम ए ज़कात था पंहुचा दिया था सही बुखारी जिल्द 2, 1402.
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