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रसड़ा विधायक ने समझा बाढ़ पीड़ितों का दर्द, सदन में रखी मुआवजे की मांग

बलिया में बाढ़ ने इस बार तबाही मचाई। कई खेत-खलिहानों को बाढ़ के पानी ने अपनी चपेट में ले लिया। कई खेतों में कटान होने लगा। फसलें पूरी तरह चौपट हो गई। जिससे किसान काफी परेशान है। अब किसानों की परेशानी को रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह ने समझा है। उन्होंने सोमवार को विधानसभा में नियम 51 के तहत टोंस की बाढ़ के कारण किसानों के फसल व आवास के नुकसान का मुआवजा देने की मांग रखी।

बसपा विधायक ने बाढ़ पीड़ितों की पीड़ा को सामने रखते हुए कहा कि बाढ़ ने कई लोगों का जनजीवन अस्त व्यस्त किया। विधानसभा क्षेत्र के सरायभारती, अतरसुहा, मुस्तफाबाद, कोप, खजुहा, वेसवान, तिराहीपुर, प्रधानपुर, फिरोजपुर, कोडरा, मिर्जापुर, लखुवा, जवनिया, सिलहटा, हजौली, लोहटा, सवरुपुर, बैजलपुर, संवरा आदि गांवों के अलावा खेतों में बाढ़ का पानी घुस गया। फसलें चौपट हो गई। सैंकड़ों एकड़ धान की फसल बर्बाद हो गई। कई रिहायशी मकान ध्वस्त हो गए।

विधायक ने इन गांवों का 26 व 27 सितंबर को निरीक्षण किया था। उन्होंने बताया कि कई किसान आवास के अभाव में खुले आसमान में रहने को विवश हैं। उनके सामने भूखमरी की स्थिति आ गयी है। सरकार से मांगी की कि क्षतिपूर्ति का आंकलन कराकर तत्काल राहत उपलब्ध कराएं। इसी क्रम में विधायक ने नियम 301 के तहत बताया कि रसड़ा विस क्षेत्र में टोंस नदी के किनारे रिंग बांध, जो गाजीपुर जनपद को जोड़ते हुए बलिया तक बना है, उमसें पांच-पांच सौ मीटर का गैप हो गया है। इसी रास्ते बाढ़ का पानी गांवों में पहुंच रहा है। कई गांवों के अस्तित्व पर ही खतरा है। उमाशंकर सिंह ने अधूरे बंधे के गैप को बनाने के साथ साथ नदी किनारे ठोकर बनवाने की भी मांग की। बाढ़ प्रभावित लंबे समय से परेशान है। ऐसे में विधायक ने उनकी परेशानी को समझा है जिससे प्रभावितों के चेहरों पर हल्की मुस्कान आई है।

Rashi Srivastav

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