बलिया। बिजली कटौती की समस्या से अब लोगों को राहत मिलने वाली है। नागपुर गांव (कताई मिल की भूमि पर) 475 करोड़ की लागत से 10 हेक्टेयर में बना पूर्वांचल का पहला अत्याधुनिक 400 केवी ट्रांसमिशन उपकेंद्र ऊर्जाकृत (चार्ज) हो गया है। सितंबर के आखिरी सप्ताह में इससे अन्य उपकेंद्रों को बिजली मिलने लगेगी। जिससे 10 लाख लोगों को सीधा लाभ होगा। ट्रांसमिशन उपकेंद्र का निर्माण दो साल पहले शुरू किया गया था। इस ट्रांसमिशन केंद्र से बलिया के अलावा मऊ और गाजीपुर के 100 से अधिक सब स्टेशनों को जोड़ा जाएगा। साथ ही रेलवे और कृषि से जुड़े सब स्टेशन भी शामिल होंगे। इससे लगभग 10 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
गर्मी में बिना कटौती बिजली मिलनी शुरू हो जाएगी आटोमेटिक है पूरा सिस्टम – कार्यदायी एजेंसी बीएचएल की मानें तो यह ट्रांसमिशन सिस्टम पूरी तरह आटोमेटिक है। गैस इंसुलेटेड सिस्टम के जरिये लोड को नियंत्रित किया जा सकेगा। इस तकनीक पर बनने वाली यह हाईटेक ट्रांसमिशन यूनिट पूर्वांचल में पहली है। प्रोजेक्ट से जुड़े सिविल इंजीनियर पुनीत कुमार, सहायक अभियंता शशि गौरव व जेई नवीन कुमार कार्य को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। बलिया और चितबड़ागांव ट्रांसमिशन की लाइन तैयार – 400 केवी ट्रांसमिशन से बलिया और चितबड़ागांव को जोड़ने वाली
लाइन तैयार हो गई है। दावा किया गया है कि इससे जुड़ने के बाद जिले को 24 घंटे निर्बाध बिजली मिलने लगेगी। पहले लोड बढ़ने के कारण मऊ के कसारा से बिना किसी सूचना के बलिया की सप्लाई आए दिन काट दी जाती थी। बलिया के अधिशासी अभियंता खालिद फजल का कहन है कि इब्राहिमपट्टी पावर ग्रीड से जोड़ने के लिए पूर्वांचल का पहला अत्याधुनिक जीआईएस तकनीक का ट्रांसमिशन केंद्र बनकर तैयार है। यह सफलतापूर्वक ऊर्जाकृत हो गया है। सितंबर के आखिरी सप्ताह तक इससे जुड़े उपकेंद्रों को बिजली आपूर्ति शुरू हो जाएगी।
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