बलिया। गाजीपुर से माझीघाट तक बनने वाले ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे के निर्माण के लिए भूमि का सीमांकन किया जा रहा है। अब यूपीडा की ओर से जल्द ही भूमि की खरीद शुरु की जाएगी। वहीं एक्सप्रेस वे के लिए किसानों से ली जाने वाली भूमि के रकबे में भी कमी की गई है।
पहले जनपद के 98 किसानों से कुल 762 हेक्टेयर भूमि ली जाने वाली थी, लेकिन अब दो तहसीलों से 460 हेक्टेयर भूमि ही ली जाएगी। करीब 79 किलोमीटर की लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे कई गांवों से होकर गुजरेगा। एक्सप्रेस वे चितबड़ागांव से फेफना, माल्देपुर, हल्दी, बैरिया, चांददियर होते हुए मांझी घाट के बाद बिहार में प्रवेश कर जाएगा। एक्सप्रेस-वे जनपद में तहसील सदर के 82 और बैरिया के 16 गांवों से होकर गुजरेगा और मांझी घाट पुल से जुड़ेगा।
पहले कहा गया था कि सदर और बैरिया तहसील के गांवों के किसानों से लगभग 762 हेक्टेयर भूमि खरीदी जाएगी। उस समय ये बताया गया कि एक्सप्रेस-वे की 100 मीटर चौड़ाई के हिसाब से किसानों से भूमि ली जाएगी। यानी छह लेन के एक्सप्रेस-वे के हिसाब से किसानों से भूमि ली जानी थी और फोरलेन (60 मीटर चौड़ाई) के हिसाब से इसका निर्माण कराया जाना था। लेकिन फिर तय हुआ कि फोरलेन (60 मीटर चौड़ाई) के हिसाब से ही किसानों से भूमि खरीदी जाएगी। अब किसानों से लगभग 460 हेक्टेयर भूमि की ही खरीद की जानी है। भूमि खरीद के लिए सीमांकन का कार्य जारी है।
इसके निर्माण की जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को दी गई है। वहीं भूमि खरीदी का काम यूपीडा की ओर से किया जाएगा। इसके लिए समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।
भूमि का सीमांकन करने के साथ ही पिलर लगाने का काम हैदराबाद की कंपनी की ओर से किया जा रही है। इस बीच सदर तहसील में कई स्थानों पर कर्मचारियों की ओर से लगाए गए पिलर को अराजकतत्वों की ओर से सरका दिया जा रहा है।
जानकारी मिलने पर कर्मचारियों की ओर से फिर से सीमांकन का काम किया जा रहा है। तहसीलदार सदर सदानंद सरोज ने बताया कि कुछ स्थानों पर शिकायत मिलने के बाद किसानों को फटकार लगाई गई है। इस समय ज जुताई और बुआई का काम भी चल रहा है इससे भी पिलरों को नुकसान पहुंच रहा हैं।