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प्रियंका सिंह ने बलिया का बढ़ाया मान, GTG 2016 सामाजिक विज्ञान में किया टॉप !

बलिया। मेहनत के बल पर जो चाहो वो हासिल किया जा सकता है। ऐसा ही कुछ रोहना गांव की प्रियंका सिंह ने कर दिखाया। उन्होंने GTG 2016 सामाजिक विज्ञान में बालिका वर्ग में पूरे प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया। प्रियंका सिंह ने अपने गांव के साथ ही बलिया का भी नाम रोशन किया।प्रियंका की सफलता से उनका पूरा परिवार खुश है। गांव में भी खुशी की लहर दौड़ गई।सभी प्रियंका की तारीफ कर रहे हैं। रोहना गांव की प्रियंका सिंह पत्नी प्रवीण सिंह, पुत्रवधु अजीत सिंह ने अपने मेहनत के दम पर लगातार तीसरी नौकरी हासिल की। कल रात माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड प्रयागराज द्वारा टीजीटी 2016 सामाजिक विज्ञान का परिणाम जारी किया गया।

जिसमें प्रियंका सिंह ने पूरे प्रदेश में बालिका वर्ग में तीसरा स्थान प्राप्त कर अपने गांव और जिले का नाम रोशन किया है। अपनी सफलता पर प्रियंका सिंह ने कहा कि जो व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य पूर्वक परिश्रम करता है उसे सफलता अवश्य मिलती है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय अपने पूरे परिवार को दिया है। इस सफलता से पूरे ग्राम सभा में हर्ष की लहर दौड़ गई है। बता दें कि प्राथमिक विद्यालय में और राजकीय इंटर कॉलेज में इनका चयन हो चुका है। उप्र माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड द्वारा गुरुवार को जारी किए गये परिणाम में प्रियंका सिंह ने प्रदेश स्तर पर तीसरा

स्थान प्राप्त करके अपने जनपद बलिया का मान बढ़ाया है। गुरुवार को टीजीटी सामाजिक विज्ञान विषय का अंतिम परिणाम जारी किया गया था। जिसमें प्रियंका सिंह पत्नी प्रवीण सिंह ने प्रदेश भर में तीसरा स्थान हासिल किया है। मूलत: रोहना बलिया की रहने वाली प्रियंका अपने पति प्रवीण सिंह के साथ सिविल सेवा की परीक्षाओं की तैयारी में लगे हुई हैं। इसके पहले प्रियंका का चयन राजकीय माध्यमिक कॉलेज में इसी पद के लिए हो चुका है तथा नियुक्ति बाकी है।

इससे पहले प्राथमिक विद्यालय में सहायक शिक्षिका पद के लिए इनका चयन हुआ था, जिसे इन्होंने जॉइन नहीं किया था। प्रियंका ने अपनी सफलता का श्रेय पति प्रवीण सिंह को देते हुए कहा कि इनके प्रोत्साहन एवं समर्पित सहयोग से ही सफलताओं की यह झड़ी लग सकी है। साथ ही माता-पिता व सास-ससुर के आशीर्वाद एवं स्नेह को भी इन्होंने अपनी सफलता में सहायक बताया है। प्रतियोगियों को तैयारी में धैर्य एवं सतत परिश्रम को सफलता का मूल मंत्र बताते हुए इन्होंने कहा कि- इस पथ का उद्देश्य नहीं है श्रांत भवन में टिक रहना, किंतु पहुंचना उस सीमा तक जिसके आगे राह नहीं।

Ritu Shahu

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