‘ददरी मेला’ देश का दूसरा सबसे बड़ा पशु मेला और पूर्वांचल का बेहद प्रसिद्ध मेला है। सर्दी की शुरुआत में व्यापार को गर्माहट देने वाले इस मेले का आयोजन पांच नवंबर से शुरु होगा। जिसके लिए जोर-शोर से तैयारियां की जा रही हैं। इसके लिए पांच मौजों के 120 किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई है।
इस मेले की खासियत है कि अलग अलग राज्यों के लोग भी यहां से पशुओं की खरीदारी करते हैं। लिहाजा मेले की तरह ही आयोजन की तैयारियां भी विशाल स्तर पर की जाती है। मेले में एक- जो दिनों के बाद से ही पशुओं व व्यापारिक गतिविधियां शुरु हो जाएंगी। लिहाजा नगरपालिका ने मेला स्थल पर जुताई कर मिट्टी को समतल करने का कार्य शुरु कर दिया है। सड़क पर सफाई का कार्य जोरों से चल रहा है। साथ ही नगर पालिका परिषद में शनिवार को ददरी मेले में कराए जाने वाले कार्यों और व्यवस्था प्रबंधन से संबंधित निविदाओं की बोली लगाई गई थी। लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिये टोल टैक्स से दुबहड़ की ओर जाने वाले बंधे को दुरुस्त करने और अगले कुछ दिनों में पीचिंग का काम भी पूरा किया जाएगा।
इस मेले के लिए नगर से सटे मौजों के 120 किसानों की 12.29 एकड़ भूमि को अधिगृहित कर लिया गया है। बता दें कि आरक्षित भूमि नगर के किसानों से किराए पर ली जाती है। जिन पांच मौजों की जमीन अधिग्रहित की गई है। इन मौजों में नेउरी तालुका विहान, नेउरी, पखरहीं, यारपुर और बेदुआं मौजा शामिल है। इसके साथ ही एक महीने तक चलने वाले इस ऐतिहासिक ददरी मेले के आरंभ में लगने वाले पशु बाजार, पुलिस थाना, पार्क, पशुओं के खरीद बिक्री पर लगने वाले कर की वसूली के अलावा पेयजल के लिए हैंडपंप आदि के लिए निविदाओं को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। नगरपालिका की ओर से टेंडर आदि का काम भी लगभग पूरा हो चुका है। इसके साथ ही मेला स्थल पर बिजली-पानी का इंतजाम किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो कार्तिक पूर्णिमा स्नान के लिये भी जिला प्रशासन ने तैयारियां कर ली हैं। अधिकारी स्नान की तैयारियों को लेकर रणनीति बना रहे हैं। इसकी जिम्मेदारी नपा प्रशासन ने एकाउंटेंट का चार्ज संभाल रहे राघव मिश्रा को दिया है।
वहीं नगर पालिक परिषद अधिशासी अधिकारी दिनेश कुमार विश्वकर्मा का कहना है कि मेले की ऐतिहासिकता को देखते हुए तैयारियों को मूर्त रूप दिया जा रहा है। इसके अलावा कार्तिक पूर्णिमा स्नान और मीना बाजार की तैयारियों को भी तेजी से पूरा कराया जा रहा है ताकि कहीं किसी चूक की गुंजाइश ना रहे।
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