बलिया
एक तरह जहां प्रदेश को सुरक्षित बनाने का दावा करती है। वहीं दूसरों की हिफाजत में लगे थाने पर तैनात पुलिस कर्मी खुद ही सुरक्षित नहीं है। आलम यह है कि जिला मुख्यालय से महज दस किलोमीटर दूर पर स्थित दुबहर थाने का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है।
बरसात होते ही पुलिस कर्मी सरकारी अभिलेखों को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा देते है। यहीं नहीं थाने की हालत को जर्जर होने की वजह से पुलिसकर्मियों को छत गिरने का भय हमेशा सताता रहता है। वे जान जोखिम में डालकर काम करने के लिए विवश है। बरसात होते ही सारी रात आवश्यक कागजात एवं उपकरण पूरे बरसात के समय इधर-उधर करते रहना पड़ता है ।
हालांकि पुलिस कर्मियों ने थाने के भवन के ऊपर प्लास्टिक की चादर तो डाल रखी है। बावजूद इसके बरसात के पानी को रोक पाना संभव नहीं हो पा रहा है । ऐसे में दर्जनों गांव की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी जब खुद ही सुरक्षित नहीं रहेंगे तो वह लोगों की सुरक्षा कैसे कर पाएंगे।
क्षेत्र के कई प्रधानों, समाजसेवियों व नेताओं ने पुलिस के आला अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि दुबहर थाने की जर्जर भवन की या तो मरम्मत कराई जाए अथवा नवीन थाना भवन बनाने की दिशा में कोई ठोस पहल करने की मांग की है। बावजूद इसके स्थिति जस की तस बनी हुई है।
हालांकि पिछले महीने औचक निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक श्रीपर्णा गांगुली ने अपने निरीक्षण में थाने पर पर्याप्त फर्नीचर के अलावा थाना बनाने की दिशा में पहल करने की बात कही थी। लेकिन इस दिशा में कितनी कार्रवाई हुई यह किसी को अभी मालूम नहीं हो पाया है ।
वहीँ थाने के एसओ संतोष कुमार ने बताया कि इस पूरी स्थिति से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। ऐसी परिस्थिति में कार्य करने में काफी कठिनाई हो रही है। बरसात में थाने का अभिलेख और उपकरण सुरक्षित रख पाना मुश्किल हो रहा है ।
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