बलिया डेस्क: बलिया के जिला अस्पताल में मरीजों का इलाज ज़मीन पर लेटाकर किया जा रहा है. जहाँ पर मरीजों के लिए प्रयाप्त बेड तक न हो, वहां की बदहाल स्थिति का अंदाज़ा लगाना ज्यादा मुश्किल काम नहीं है. वहीँ ऐसे में विकास की बात बेईमानी ही साबित होगी.दरअसल हुआ कुछ यूँ कि डायरिया की बीमारी की वजह से नागपुर गांव में 50 से अधिक लोगों को जिला अस्पताल में ले जाया गया.
इस दौरान बेड तो इतना था नहीं कि सभी मरीजों को उस पर लेटाया जा सके. ऐसे में इमरजेंसी में उनका इलाज ज़मीन पर ही लेटाकर किया जाने लगा. यह मामला बीते कल शुक्रवार का है जिसकी तस्वीर भी सामने आई है. बलिया की बदहाल स्थिति लगातार सामने आ रही है. अभी बारिश और बाढ़ की वजह से हर तरफ दुश्वारियां दिख ही रही थी कि इस बीच यहाँ की स्वास्थ्य सेवाएं कैसी है, इसका नमूना भी जनता के सामने आ गया.
आपको बता दें कि नागपुर गांव में दूषित पानी पीने की वजह से करीब पचास लोगों को डायरिया हो गया जिसके बच्चे भी शामिल थे. जानकारी मिलने के बाद आनन फानन में प्रशासन ने उन्हें इलाज के लिए एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुँचाया लेकिन वहां कोई इंतजाम नहीं था. इमरजेंसी के नाम पर कोई इंतजाम देखने को नहीं मिला. ऐसा तब हुआ है जब स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बजट में हर साल करोडो रूपये फूंके जा रहे हैं.
इस मामले में एक मरीज ने बताया कि दूषित पानी की वजह से करीब पचास लोगों को दस्त उलटी शुरू हो गयी. बाद इसके हमें जिला अस्पताल ले जाया गया. बीमारी की वजह से एक बच्ची की मौ’त भी हो गयी है. अस्पताल में बेड न होने की वजह से हमें ज़मीन में लेटाकर इलाज किया जा रहा है. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इमरजेंसी में महज़ 15 बेड ही हैं.
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