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कोरोना के नाम पर लाखों रुपए डकार गया पंचायत विभाग, सैनिटाइजेशन में हुआ बड़ा घोटाला

कोरोना एक ऐसी बीमारी, जिसने लोगों को हर मोर्चे पर तोड़ कर रख दिया। कोरोना लाखों लोगों का जीवन निगल गया। करोड़ों का रोजगार छिन गया। आर्थिक हालत बद से बदतर हो गई। गरीब निवाले-निवाले को मोहताज हो गए लेकिन देश के भ्रष्ट विभागों के लिए कोरोना मानो सोने की चिड़िया बन गई है। जो जब भी आती है, विभागों का खजाना भर जाती है। इन्हीं में से एक विभाग है पंचायत विभाग, जहां कोरोनाकाल में जमकर भ्रष्टाचार पनपा। महामारी से गांवों को बचाने के लिए दवा-सैनिटाइजर का छिड़काव करने दिए गए लाखों का फंड पंचायत विभाग चट कर गया।

नवानगर ब्लॉक की 21 ग्राम पंचायतों की बात करें तो यहां के पंचायत विभाग ने कोरोनाकाल में दवाईयां, मास्क आदि के नाम पर बड़ा घोटाला किया है। यहां ग्राम पंचायतों में कोविड से बचाव के नाम पर बड़ी राशि आहरित कर ली गई।  दवा छिड़काव, फिनायल, सेनेटाइजर, ब्लीचिंग व सोडियम पाउडर तथा साफ सफाई के नाम पर करीब 16.25 लाख रुपए का भुगतान कराया जा चुका है। लेकिन जमीनी स्तर पर ग्रामीण आज भी गंदे और बदबूदार माहौल में रह रह हैं। मच्छरों से मुक्ति की दवा के नाम पर पंचायत विभाग ने शासन से पैसे वसूले जबकि हकीकत तो यह है कि पिछले 2 माह में दवा का छिड़काव है नहीं किया गया।

पंचायत विभाग ने कोरोना के नाम पर जमकर वसूली राशि– कोरोना के नाम पर राशि आहरण का यह घोटाला नवानगर ब्लॉक के आराजी करियापार, बेलसड़ी, भरथांव, चकभड़िकरा, चकखान, देवकली, गांग किशोर, हुसैनपुर, जमालपुर, करसी, सरियांव, जमुई, भांटी, भटवाचक, हरनाटार, कठौड़ा, नरहनी तुर्कवलिया, रामपुर कटराई, रुद्रवार, सिसोटर और बनहरा में किया गया है। इसमें सबसे ज्यादा वसूली घाघरा के किनारे बसा कठौड़ा गांव के लिए की गई। यहां पंचायत विभाग ने एक लाख 80 हजार रुपये आहरित कर लिए। वहीं भटवाचक में 1.55 लाख, सिसोटर में 1.44 लाख, जमुई में 1.40 लाख, बनहरा में 97914, रामपुर कटराई में 97714, रुद्रवार और नरहनी तुर्कवलिया में 95-95 हजार तथा भांटी में 65 हजार रुपये दवा छिड़काव व सफाई किट पर खर्च करना दिखाया गया है।

दवा छिड़काव के नाम पर लिए लाखों रुपए, ग्रामीणों ने बताई सच्चाई– इस बड़े घोटाले के सामने आने के बाद ग्रामीणों से बात की गई, तो उनका कहना था कि आज तक न तो दवा का छिड़काव किया गया है और न कभी फागिंग ही हुई है। संक्रमण से गांव को बचाने के नाम पर लाखों रुपये का गबन ग्रामीणों के साथ धोखा है। इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा हैरानी की बात तो यह है कि लाखों रुपये आहरित करने के बाद भी अधिकतर ग्राम पंचायतों में सिर्फ कोरम ही पूरा किया गया है। पंचायत विभाग की इस करतूत का पता विभागीय अधिकारियों को भी है लेकिन अधिकारी मौन बैठें हैं।

Rashi Srivastav

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