बलिया डेस्क: बलिया को बागियों का इलाका माना जाता है, जहाँ से देश की आजादी के तमाम नायक निकल चुके हैं और आज़ाद भारत में सत्ता के सामने बागी तेवर रखने वालों की भी पहचान रहा है बलिया जिला. इसके साथ साथ बलिया ने देश को एक प्रधानमंत्री भी दिया है. चंद्रशेखर सिंह. आपको बता दें कि आज ही के दिन 10 नवम्बर 1990 को उन्होंने देश के आठवें प्रधानमन्त्री के तौर पर शपथ ली थी.
21 जून 1991 तक वह देश के पीएम रहे. हालाँकि राजीव गांधी के कथित तौर पर जासूसी कराने के मामले को लेकर कांग्रेस से उनके सम्बन्ध बिगड़ गए और समर्थन न मिलने की वजह से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. हालाँकि अभी तक पुख्ता तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि राजीव गाँधी की जासूसी करने का आदेश किसने दिया था. 1984 में उन्होंने देश को करीब से समझने के लिए भारत की पदयात्रा की. इस पदयात्रा ने इंदिरा गांधी के भीतर भी बेचैनी पैदा कर दी थी.
वहीँ उनके बारे में दिलचस्प बात एक यह भी है कि जब 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनी तो उन्होंने कोई भी मंत्री पद नहीं लिया. 1977 में ही उन्होंने बलिया से ही अपना पहला लोकसभा चुना लड़ा और जीत हासिल की. इससे पहले 1962 से 1977 तक वह राज्यसभा के सदस्य रहे. वहीँ वह संसद में बेहतरीन तक़रीर के लिए जाने जाते थे और उन्हें आउटस्टैण्डिंग पार्लिमेन्टेरियन अवार्ड से भी नवाज़ा गया था.
आपको बता दें कि उनका जन्म बलिया के इब्राहिमपट्टी गाँव में 1 जुलाई 1927 को हुआ था. उन्होंने इसके बाद अपनी शुरूआती पढ़ाई भीमपुरा के राम करन इण्टर कॉलेज में और बाद में एडिग्री इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एमए किया. छात्र जीवन में ही वह राजनीति से जुड़ गए थे और उन्हें फायरब्रान्ड के नाम से जाना जाने लगा था. आज पूर बलिया वालों के लिए फक्र का दिन है.
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