बलिया। जिला महिला अस्पताल में मरीजों को एक्सपायरी दूध बांटने वाली फर्म पर अभी तक कार्यवाही नहीं हुई। मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाली कंपनी पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इतने फिदा हुए कि कांट्रेक्ट खत्म होने के बाद भी फर्म को महिला अस्पताल में दूध-नाश्ता, भोजन के सप्लाई की अनुमति दे दी गई थी।
मरीजों को एक्सपायर दूध बांटने के बाद भी अधिकारी कार्यवाही के बजाए फर्म के बचाव में लगे हैं और अब तक केवल नोटिस-नोटिस का खेल ही हो रहा है। कार्यवाही के नाम पर अभी तक सिर्फ जांच जारी होने की बात कही जा रही है।
बता दें कि मरीजों को दूध-नाश्ता बांटने वाली फर्म बालाजी कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स का कांट्रेक्ट मार्च 2022 में ही खत्म हो चुका था लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की रजामंदी से महिला अस्पताल में दूध-नाश्ता और भोजना की सप्लाई हो रही थी। कांट्रैक्ट खत्म होने के बाद भी जिला अस्पताल के अधिकारी ने इसकी जांच-पड़ताल नहीं की।
दरअसल जिला अस्पताल अथवा जिला महिला अस्पताल में रोगियों के बीच दूध, नाश्ता तथा दोनों वक्त के भोजन की सप्लाई कौन एजेंसी अथवा संस्था करेगी इसका चयन जिला स्वास्थ्य समिति करती है। सूत्रों की मानें तो बालाजी फर्म का लम्बे समय से जिला महिला अस्पताल में कब्जा है। इसी फर्म के द्वारा हर साल मरीजों को दूध-नाश्ता का वितरण किया जाता है। जिला महिला अस्पताल प्रशासन ने तीन बार टेंडर करने की प्रक्रिया की, लेकिन प्रयास सफल नहीं हो सका।
हर बार फर्म को भी कांट्रैक्ट मिला। साल 2021 में 79 रुपए के रेट से फर्म से सप्लाई करने की बात हुई। काम 31 मार्च तक ही करना था। लेकिन इसके बावजूद भी अधिकारियों की उदासीनता और मौन स्वीकृति से फर्म अप्रैल में भी दूध-नाश्त बांटती रही। और 13 अप्रैल को इसी कंपनी ने 40 बेड़ों पर 33 दिन पहले एक्सपायर हो चुके दूध को बांटा।
महिला अस्पताल में मरीजों को अमूल ब्रांड का 250 मिलीग्राम पैक्ड दूध वितरित करने का प्राविधान है। जिसकी कीमत करीब 16 रुपये हैं। हालांकि बालाजी फर्म ने 10 रुपये मुल्य का मदर डेयरी ब्रांड का 150 मिलीग्राम का पैकेटबंद दूध बांट दिया। लोगों का कहना है कि यह सिलसिला लम्बे समय से चल रहा था। इस प्रकरण के उजागर होने के बाद कागजों में जांच बैठा दी गयी। जिम्मेदारों की ओर से तीन बार फर्म को नोटिस भी जारी कर दिया गया, लेकिन जांच कमेटी ने चार कर्मचारियों का बयान दर्ज किया है लेकिन कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई।
इस सम्बंध में जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुनीता सिन्हा का कहना है कि अनुबंध खत्म हो चुका था, तो टेंडर जिला स्वास्थ्य समिति को करना था। पूर्व में इसके लिए कमेटी को अवगत भी कराया गया है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। फर्म व कर्मचारियों की भूमिका की जांच चल रही है। जल्द ही कार्रवाई की जायेगी।
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