पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर ने सोमवार को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के साथ ही समाजवादी पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया।
इसकी सूचना मिलते ही बलिया जिले की राजनीति में हलचल सी मच गई। समर्थकों के साथ राजनीति से जुड़े लोगों के बीच इसको लेकर चर्चा होती रही।
इस संबंध में जब नीरज शेखर से बात की गई तो उन्होंने इस्तीफे के पीछे कोई राजनीतिक कारण ना बताकर इसे नितांत व्यक्तिगत कारण बताया। नीरज शेखर ने बताया कि उन्होंने अपने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दिया है। बताया जा रहा है कि राज्यसभा अध्यक्ष ने नीरज शेखर के इस्तीफा को स्वीकार भी कर लिया है।
नीरज शेखर का राज्यसभा कार्यकाल नवंबर 2020 तक था। कहा जा रहा है नीरज शेखर को भाजपा 2020 में यूपी से राज्यसभा में भेज सकती है। यह भी कहा जा रहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर पर लिखी राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश की पुस्तक ‘चंद्रशेखर- द लास्ट आइकन ऑफ आइडियोलॉजिकल पॉलिटिक्स’ का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विमोचन करेंगे।
इससे पहले उनके बेटे नीरज शेखर भाजपा में शामिल हो जाएंगे। वैसे नीरज शेखर के सपा छोड़ने और राज्य सभा सांसद पद से इस्तीफा देने की अटकलें उसी दिन से शुरू हो गई थीं जिस दिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने नीरज शेखर का बलिया से टिकट काटकर सनातन पांडेय को दे दिया था। इसके बाद से नीरज शेखर के समर्थकों ने भी खुले तौर से सपा से किनारा करते हुए भाजपा के साथ जाने का एलान कर दिया था।
लोकसभा चुनाव के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री के राजनीतिक सलाहकार रहे एचएम शर्मा ने भी इस दौरान वीरेंद्र सिंह मस्त के पक्ष में पत्रकार वार्ता की थी और भाजपा को वोट देने की अपील की थी। ताजा घटनाक्रम भी उसी घटनाक्रम का हिस्सा माना जा रहा है। नीरज शेखर का इस्तीफा देना उनकी साफ तौर पर उनकी अखिलेश यादव और पार्टी नेतृत्व के प्रति नाराजगी को व्यक्त करता है।
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