एक तरफ जहाँ बढती महंगाई और आसमान छूती प्याज की कीमतें आम जनता को रुला रही हैं वहीँ दूसरी तरफ सत्ता में बैठे नेताओं का इस पर अजीबोब गरीब बयान आने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है. बीते दिनों बलिया के सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने भी कुछ ऐसा ही बयान प्याज पर दे दिया था. दरअसल वीरेंद्र सिंह मस्त ने संसद में बयान देते हुए कहा था कि गंगा यमुना का मैदान दुनिया की सबसे उपजाऊ ज़मीन है.
उन्होंने कहा था कि लोगों को देखना चाहिए कि वहां के किसान कैसे प्याज पैदा कर रहे हैं. उन्होंने कहा था कि वहां के हर एक किसानों के घरों में सौ सौ बोर प्याज रखी हुई है. इसके साथ साथ वीरेंद्र सिंह मस्त ने यहाँ तक कह दिया कि उनके इलाके में पचीस पचीस रूपये किलों के हिसाब से प्याज बिक रही है. उन्होंने लोगों से अपने साथ मोहम्मदाबाद चलने को कह दिया जहाँ उनके हिसाब से एक ट्रक प्याज पचीस रूपये किलो के हिसाब से बिक रही है.
लेकिन उनके बयान के बाद जब इसकी पड़ताल की गयी तो उनका दावा एकदम झूठ निकला.
दरअसल मुहम्मदाबाद में भी प्याज का रेट आसमान छू रहा है और वहां भी प्याज अस्सी से सौ रूपये किलों बिक रही है. यहाँ की सभी दुकानों पर प्याज का रेट करीब करीब सौ रूपये किलो ही है. वहीँ वहां के दुकानदारों का कहना है कि बीते पंद्रह दिनों में प्याज का रेट में डेढ़ गुने तक का इजाफा हो गया है.
जहाँ 25 नवम्बर तक प्याज का रेट साथ से सत्तर के बीच था वहीँ पांच दिसंबर आते आते रेट नब्बे से सौ के आस पास पहुँच गया. वहां के लोगों का कहना है कि उनके बयान से तो यही लगता है कि उन्होंने करीब आठ महीने पहले ही प्याज खरीदा होगा.
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