लोकसभा चुनाव- बलिया में भाजपा के लिए क्यों खाली है मैदान ?

लोकसभा चुनाव के मदेनज़र बलिया में सातवें चरण में मतदान होने हैं। भाजपा ने अपना प्रत्याशी पहले ही मैदान में उतार चुकी है। भाजपा ने इस सीट से भदोही के सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त को मैदान में उतारा है। तो वहीँ गठबंधन से टिकट फाइनल में हो रही देरी से से हर दिन बलिया वालों की बेचनी बढती जा रही है ।

सातवें चरण के चुनाव के लिए 22 अप्रैल से नामांकन भी शुरू हो रहा है, लेकिन अब तक गठबंधन और कांग्रेस से उम्मीदवारों की तस्वीर धुंधली है। सभी मान रहे कि अब देरी ठीक नहीं है। देरी को लेकर शीर्ष नेतृत्व के प्रति समर्थकों का गुस्सा भी बढ़ रहा है।

सपा-बसपा गठबंधन में बलिया की सीट समाजवादी पार्टी के खाते में  है, लेकिन अंदर खाने की खबर पर यकीन करें तो बसपा और सपा दोनों दलों की ओर इस सीट को लेकर  दावे किए जा रहे हैं।

वहीँ लगातार नीरज शेखर अपना भ्रमण इलाके में कर रहे हैं । तो दूसरी तरफ बसपा से अंबिका चौधरी भी पीछे नहीं हैं । इस सीट पर टिकट के दावेदारों की लम्बी लिस्ट है जिनकी चर्चा इलाके से लेकर लखनऊ तक चल रही है। अब आने वाले दिनों में तस्वीर साफ़ हो जायेगी की बलिया की राजनीति किस करवट बैठेगी।

भाजपा और सुभासपा ने यहां अपना उम्मीदवार उतार रखा है, लेकिन गठबंधन और कांग्रेस की ओर से अभी तक मंथन ही हो रहा हैं।  टिकट के मामले में देरी के पीछे जानकार मानते हैं कि यह देरी टिकट के नामी कई प्रबल दावेदारों के चलते ही हो रही है।

शीर्ष नेतृत्व को पता है कि टिकट के मामले में किसी एक को ही खुश किया जा सकता है। उम्मीदवार की घोषणा के बाद टिकट से बेदखल बाकी के उम्मीदवार किस मोड में होंगे, इस पर भी मंथन हो रहा है। वहीं कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी को ताक रही है, ताकि वह भी बलिया में जातीय समीकरण के अनुसार अपना प्रत्याशी उतार सके। आगे माहौल चाहे जो बने, अभी हर तरफ टिकट मिलने और नहीं मिलने की ही चर्चा है।

वहीँ दूसरी तरफ इतिहास पर नज़र डाला जाए तो बलिया संसदीय सीट पर बाहरी उम्मीदवार कई बार अपना भाग्य आजमाने पहुंचे, लेकिन उन्हें मुंह की खानी पड़ी। कभी भी इस धरती ने दमखम वाले बाहरी उम्मीदवारों को स्वीकार नहीं किया।

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