बलिया में ही क्यों लगाया जाता है ददरी मेला, जानें क्या है इसकी वजह?

सुनील कुमार

बिहार और पूर्वी यूपी के लोग देश के हर जगह में मिल जाएंगे जो कि बोली, संस्कृति से एक ही लगते हैं लेकिन इसमें से अगर कोई भृगु बाबा कि जयकारे लगाये तो समझ जाइये कि वह बलिया का है। बलिया के लोग अपने को बागी बलिया (स्वतंत्रता आन्दोलन में उसकी अपनी भूमिका है) भी कहते हैं। इसी धरती पर ददरी मेला लगता है।

बलिया की धरती पर कार्तिक पूर्णिमा को लगने वाला ददरी मेला काफी प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि उस दिन गंगा के संगम पर स्नान करने से साठ हजार वर्ष तक काशी में तपस्या करने के पुण्य के बराबर होता है। इस दिन केवल बलिया के ही नहीं पूर्वांचल के अलग-अलग जिले और बिहार से लोगा गंगा स्नान के लिए आते हैं जिसकी संख्या करीब 5 लाख तक पहुंच जाती है।

गंगा में स्नान करने के लिए गांव-गांव से महिलाओं-पुरुषों-बच्चों कि टोलियां रात से ही ट्रैक्टर, जीप, टैम्पु, बस व अन्य साधनों से बलिया पहुंचने लगते हैं। इनमें से तो कुछ लोग ऐसे होते हैं जो पहली बार बलिया आते हैं। बलिया के चारों तरफ से आने वाली सड़कों पर लोगों कि भारी भीड़ देखी जाती है।

लोग अपनी टोलियों को पहचानने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं कोई गन्ने को बांध कर रखता है तो कोई निशाना के लिए छाता, डंडा इत्यादी तरीके को अपनाते हैं जिसको वह ऊंचा करके रखते हैं ताकि टोली के लोग उस निशान को देख कर एक साथ चल सकें। काफी महिलाएं, बच्चे फिर भी बिछुड़ जाते हैं, जो अपने परिवार को खोजते, दिखते हैं जगह जगह पर पुलिस-प्रशासन लोगों की सहायता के लिए मुस्तैद रहती हैं।

सरकार द्वारा अतिरक्त बसों का प्रचालन किया जाता है साथ ही साथ प्राइवेट गाड़ियों (बस, आरटीवी, टैम्पु) में लोग दुगने-तिगुने संख्या में यात्रा करने को विवश होते हैं।
गंगा स्नान करने के बाद लोग मेला घुमने जाते हैं जहां पर 500 से अधिक दुकानें होती हैं। इस मेला में महिलाओं के श्रृंगार के लिए मीना  बाजार तो बच्चों के लिए झुले, सर्कस होते हैं।

दंगल, कवि सम्मेलन और मुशयारों का भी आयोजन होता है। मेले में जलेबी का एक खास महत्व है, बहुत से लोग गुड़ कि जलेबी खाना ज्यादा पसंद करते हैं। उस दिन मेले में अत्यधिक भीड़ होने के कारण लोग शहर से बाहर आकर लिट्टी चोखा खाते हैं जो कि बलिया के प्रसिद्ध खाना है। वापस जाने के लिए लिए सार्वजनिक गाड़ियों का काफी समय तक इंतजार करना पड़ता है।

ददरी मेला से 15-20 दिन पहले यहां पर भारत का दुसरा सबसे बड़ा पशु मेला लगता है जिसमें जानवरों की काफी खरीद-बिक्री होता है। ददरी मेला करीब एक महीने चलता है जिसको लेकर जिले में लोगों का काफी उत्साह होता है। कार्तिक पूर्णिमा से ठंड की शुरूआत और शादी-विवाह का सिजन शुरू हो जाता है।

ददरी मेला का नामकरण भृगु महर्षि के शिष्य दर्दर मुनि के नाम पर पड़ा। कहा जाता है कि महर्षि भृगु के छाती पर लात मारने के बाद विष्णु द्वारा दिए गए श्राप से मुक्ति पाने के लिए महर्षि भृगु जप कर रहे थे तो उनको ज्योतिष गणना से पता चला कि गंगा नदी सूख जाएगी। महर्षि भृगु ने गंगा को जीवित रखने के लिए अपने शिष्य दर्दर मुनि से अयोध्या तक बहने वाली सरयु नदी को गंगा को गंगा में संगम कराने को कहा।

दर्दर मुनि ने अपने गुरू के कहने पर गंगा और सरयु का संगम कराया। संगम होने के बाद वहां पर 80 हजार लोग एकत्रित होए और एक महिने तक वहां पर मेला का माहौल बना रहा। जब से ही यहां पर ददरी मेला का आयोजन माना जाता है।

गंगा, सरयु के संगम वाले स्थान पर घर-घर-दर-दर कि आवाज निकलने लगी तो महर्षि भृगु ने सरयु को घघड़ा और अपने शिष्य का नाम दर्दर रखा। आज बलिया के एक तरफ गंगा तो दूसरी तरफ घघरा नदी का प्रवाह होता है। बलिया के स्थानीय घघरा को सरयु के नाम से ही जानते हैं और उसके अविवाहित नदी मानते हैं इसलिए अविवाहित लोगों को मृत्यु के बाद सरयु में और विवाहित लोगो की मृत्यु के बाद गंगा नदी में बहाते हैं।

 

बलिया ख़बर

Recent Posts

आजाद अधिकार सेना ने ओम प्रकाश को सौंपी बलिया जिलाध्यक्ष की कमान

आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने क्षेत्र के…

3 days ago

जमुना राम मेमोरियल स्कूल में धूमधाम से मना 80वां स्वतंत्रता दिवस, बच्चों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

बलिया। जमुना राम मेमोरियल स्कूल, मानपुर चितबड़ागांव में 15 अगस्त को 80वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास,…

1 week ago

सीबीएसई ईस्ट जोन हैंडबॉल में बलिया का जलवा, जमुना राम मेमोरियल स्कूल बना उपविजेता

सीबीएसई ईस्ट जोन हैंडबॉल प्रतियोगिता 2026-27 में बलिया की जमुना राम मेमोरियल स्कूल, चितबड़ागांव की…

2 weeks ago

बलिया में विनोद राय की दसवीं पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब, दिग्गज नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

बलिया के नरही थाना गोलीकांड के शहीद विनोद राय की दसवीं पुण्यतिथि पर बुधवार को नरही…

2 weeks ago

बलिया का बढ़ा मान! जमुना राम मेमोरियल स्कूल सीबीएसई ईस्ट जोन हैंडबॉल के फाइनल में

मिर्जापुर। सनबीम एकेडमी नॉलेज पार्क, मिर्जापुर में आयोजित सीबीएसई ईस्ट जोन हैंडबॉल प्रतियोगिता 2026-27 में…

2 weeks ago

तीन बार के विधायक उमाशंकर सिंह नहीं रहे, बलिया की राजनीति ने खोया अपना सबसे बड़ा जननेता

बलिया। रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक रहे और बहुजन समाज पार्टी (बसपा)…

3 weeks ago