पुलवामा घटना के बाद एक तरफ जहाँ देश भर में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा भरा है । वहीँ दूसरी तरफ अब केंद्र ने एक बड़ा फैसला लिया है। दरअसल खबर कुछ यूँ है क़ि सरकार ने जमात-ए-इस्लामी पर बैन लगा दिया है. सरकार ने जमात-ए-इस्लामी पर यह प्रतिबन्ध पांच साल के लिए लगाया है। आपको बात दें कि इस संगठन पर बैन लगाने से पहले इसके चीफ अब्दुल हामिद फयाज हिरासत में ले लिया है। हालाँकि उनकी गिफफ्तारी पुलवामा घटना के बाद हो गई थी।
वहीँ अपने ऊपर लगाये गए इस प्रतिबन्ध पर जमात-ए-इस्लामी का कहना है कि एक साजिश के तहत यह कार्यवाई की गई है ताकि घाटी में अस्थिरता पैदा हो जाये। इसके साथ जमात-ए-इस्लामी के दो दर्जन से अधिक कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में ले लिया गया है. सरकार का कहना है कि यह गैर कानूनी संगठन है। सरकार ने कहा है कि गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम के तहत यह कार्यवाही की गई है।
आपको बता दें कि पुलवामा घटना के बाद सेना ने बड़ी कार्यवाही की थी और उसके बाद कश्मीर से कई लोगों को हिरासत में लिया गया था और इसी के तहत अब जमात-ए-इस्लामी पर भी कार्यवाही की गई है। जमात-ए-इस्लामी के कई बड़े नेताओं को भी हिरासत में ले लिया गया है। दरअसल पुलवामा घटना के बाद घाटी का माहौल भी थोड़ा खराब हुआ है और वहां पर सेना एक्शन में हैं।
ऐसे में अब इस कार्यवाही को अंजाम दिया गया है. इसके अलावा सरकार ने अलगाववादी नेताओं पर भी कार्यवाही की थी। सरकार ने उन्हें मिली सुरक्षा वापस ले ली थी और कई नेताओं को हिरासत में लिया गया था। हिरासत में जाने वाले में यासीन मलिक का नाम भी शामिल है। फिलहाल अब वहां पर एक बार फिर से शांति स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। वहीँ जमात-ए-इस्लामी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर नज़र रखी जा रही है। इन्हें लेकर सेना ज़रा भी चूक नहीं लेना चाहती है ।
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