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बलिया में नेताजी मुलायम सिंह की जयंती के उपलक्ष्य में हुआ कवि सम्मेलन और मुशायरा कार्यक्रम का आयोजन

बलिया के गंगा बहुउद्देशीय सभागार में विराट कवि सम्मेलन और मुशायरा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन समाजवादी पार्टी के संस्थापक नेता जी मुलायम सिंह यादव की जयंती के उपलक्ष्य में किया गया। कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रख्यात कवियों ने काव्य पाठ कर समां बांध दिया।

देश के जाने-माने कवियों और शायरों को सुनने के लिए आए लोगों से विशाल सभागार खचाखच भरा था। कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत बतौर मुख्य अतिथि गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बलिया की इस धरती से मेरा करीबी रिश्ता है। बलिया मेरा ननिहाल है। उन्होंने अपनी बात काव्यात्मक ढंग से कहते हुए कहा कि ”यहां के फूल में जो ताजगी है, रौनक है, किसी चमन के मुकद्दर में आ नहीं सकती, ये सरजमीं है बहादुर वतनपरस्तों की, यहां की खाक को हर खाक पा नहीं सकती।

इस दौरान कवियत्री शबीना अदीब ने ” जाने क्यों उसके बंदे अलग हो गये, ईश्वर भी वही है, खुदा भी वही” और “खामोश लब हैं, झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फत नई-नई है” सुनाया और लोगों का दिल जीत लिया। वहीं, कवि अज्म शाकिरी ने” मैं उदासी के मौसम में भी, अपने दिल के खयाबान से, गांव की तितलियों के लिए, फूल चुन-चुन के लाता रहा” एवं “रातभर सो में भींगकर, चांद को ऐसी सर्दी लगी, सारा दिन धूप में बैठकर,अपने कपड़े सुखाता रहा” आदि पर दर्शकों की खूब तालियां बजीं।

कवि शम्भू शिखर और कवियत्री सरिता शर्मा की “इस शाम को रंगीन बना लें इतना कि कोई कोना न बचे रौंग के स्याही से” प्रस्तुति पर खूब तालियां बजीं। कवि नीलोत्पल मृणाल ने “मुट्ठी भर लें के हम जमीन, चल देंगे एक दिन आसमान में” पर खूब तालियां बजीं।

इसके साथ ही देर रात तक चले कार्यक्रम में अन्य कवियों ने अपने काव्य पाठ से सभागार में मौजूद दर्शकों को विभिन्न रसों से सराबोर कर दिया। इससे पूर्व मुख्य अतिथि गाजीपुर सांसद अफजाल अंसारी, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविन्द चौधरी, पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी, विधायक मोहम्मद जिआऊदीन रिजवी सहित विशिष्ट अतिथियों, कवि, कवियित्रियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।

Rashi Srivastav

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