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करबला का दर्द भरा किस्सा, हजरत इमाम हुसैन (र.अ.) के बारे में मौलाना तारिक जमील साहब ने बताया

दोस्तों अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह व बरकातहू दोस्तों आज हम मौलाना तारिक जमील साहब के कैसे वीडियो लेकर आए हैं जिसमें उन्होंने कर्बला का वाकया बयान किया है दोस्तों मौलाना कहते हैं यह वाकया क्यों हुआ आखिर इसकी क्या वजह थी मौलाना कहते हैं कि यह वाक्य एक पैगाम है कि खुदा को राजी करने के लिए कितना कुछ करना पड़ता है जान की बाजी लगा देनी पड़ती है दोस्तों लोग गर्मी के रोजे में 12 घंटे प्यासे रहते हैं तो तड़प जाते हैं और आपको खबर है कि हमारे नबी की औलाद है 72 घंटे प्यासी और भूखे रहे प्यास की शिद्दत थी और पानी का एक कतरा भी ना था और आगे इंसान की शक्ल में दरिंदे खड़े हुए थे.

जब सारे लोग शहीद हो गए तो पीछे अहलेबैत के लोग रह गए और इमाम अली के फौज में जो सबसे पहला इंसान शहीद हुआ उसका नाम मुस्लिम बिन औसज था और याज़ीदियो की तरफ से जो सबसे पहले कत्ल हुए हैं उनका नाम सालिम और यसर था और उनको कत्ल करने वाले थे उबैदुल्लाह बिन उमैर कलबी तो याजीदियो की तरफ से आवाज आई कि यह लोग मरने आए हैं इनसे अकेले-अकेले मुकाबला करोगे तो तुम्हें खत्म कर देंगे.

इन्हें इकट्ठा मारो हुसैन रजि अल्लाह ताला अन्हा के साथ 32 घुड़सवार और 40 पैदल थे जब उन्होंने पहला हमला किया तो 3000 लोगों को मार दिया तो उन्होंने कहा कि पहले इनके घोड़ों को मारो तो 500 तीरंदाज ओं ने इकट्ठे उन पर तीर चलाए और उनके सारे घोड़े मार दिए और सब के घोड़े गिर गए तो सारे के सारे पैदल हो गए तो फिर जब नमाज का वक्त आया जोहर का वक्त तो आपने इशारा किया कि इन लोगों से कहो कि नमाज पढ़ने दे.

जी हां दोस्तों अगर 1439 साल में नमाज की माफी होती तो अहले कर्बला को होती हजरत हुसैन रजी अल्लाह ताला अन्हा ने सजदे में सर रखे बताया कि नमाज किसी भी हाल में छूट नहीं सकती और उसकी कभी माफी नहीं हो सकती तो उन्होंने आगे होकर कहा कि भाई नमाज के लिए जंग रोको तो उन लोगों ने नमाज की इजाजत नहीं दी तो हुसैन रजि अल्लाह ताला अन्हा ने कहा कि नमाज तो नहीं छूटेगी ।।आगे देखें वीडियो में।।

बलिया ख़बर

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