दुनिया से चले जाने के बावजूद भी इंसान अपने कर्मों की वजह से हमेशा याद किये जाते हैं। ऐसी ही अब्दुल खालिक अंसारी भी हमेशा याद किये जायेंगे और हर मज़हब के लोग उनके चले जाने के बाद भी उनको शायद ही कभी भुला पाएंगे। मुंगावली अशोकनगर के रहने वाले अब्दुल खालिक अंसारी भोपाल सीआईडी ऑफिस से एसपी के पद से 1994 में रितायर हुए थे। उनका सोमवार को निधन हो गया लेकिन इसके बाद जब उनकी वसीयत पढ़ी ग्यितो जिस जिस ने भी उनकी वसीयत को सुना उनकी आँखें नमहो गईं और सभी के दिल से एकाएक बस यह एक बात ही निकली जाते जाते भी कमाल कर गए अंसारी साहब।
अपनी वसीयत में अंसारी साहब ने अपने बेटे और बेटियों को कुछ हुक्म दिया है। दरअसल उनके निधन के बाद सन्टॉप हाईस्कूल में एक शोकसभा का आयोजन किया गया था जहाँ पर उनके बेटे ने उनकी वसीयत सभी के सामने पढ़ी। अपनी वसीयत में अंसारी साहब ने अपने हर एक बेटे और बेटियों को पचास पचास पेड़ लगाने को को कहा है। इसके अलावा अपनी वसीयत में में अंसारी साहब ने और भी काफी कुछ लिखा है।
दरअसल अंसारी साहब जिस मोहल्ले में रहते थे उसके चारों तरफ अलग अलग धर्म के धार्मिक स्थल है।अंसारी साहब ने अपने बेटे और बेटियों को सभी धार्मिक स्थलों को पैसे देने के लिए कहा है। आपको बता दें कि अंसारी साहब के 6 बेटे और बेटियां हैं। अंसारी साहब के घर के चारों तरफ जामा मस्जिद से लेकर जैन मंदिर , कृष्णा मंदिर और दरगाह है।
इसके अलावा अपनी वसीयत में अंसारी साहब ने गुरुद्वारा के लिए 5 हजार को कहा है। इसके अलावा जिस स्कूल में उन्होंने पढ़ाई की है अपनी वसीयत में उस स्कूल को भी दस हज़ार रुपए देने की बात कही है। उनकी वसीयत पढ़कर सभी लोग भरे मन से उन्हें दुआ दे रहे हैं।
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