रिपोर्ट कहता है कि मोदी की निजी लोकप्रियता बरकरार है। पार्टी से ज्यादा लोग मोदी को चाहते हैं। उनके खिलाफ निजी तौर पर भ्रष्टाचार के कोई आरोप नहीं लगे हैं। जनमानस उन्हें फिर से मौका दे सकती है।
पाक के ही एक लेखक (निगार) ने अपने एक लेख में कहा है कि भारत बहुत ही भाग्यशाली है कि उसके पास मोदी जैसा नेता है।
दरअसल, त्रिपुरा की जीत ने भाजपा की लोकप्रियता शिखर तक पहुंचा दी। उत्तर से लेकर दक्षिण और पूरब से लेकर पश्चिम तक भाजपा (गठबंधन सहित) आज 21 राज्यों में सत्ता पर काबिज है। इसके बाद लगा विपक्ष के हाथ कुछ भी आने वाला नहीं है। लेकिन यूपी में हुए उपचुनाव ने राजनीतिक सोच बदल दी। गोरखपुर लोकसभा सीट से भाजपा हार गई। यहां पर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी एक साथ मैदान में आ गई थी। अति विश्वास में भाजपा की ‘लुटिया’ डूब गई।
इस सीट पर जीत ने विपक्षी पार्टियों के हौसले बुलंद कर दिए। मोदी के खिलाफ जीतने का नया मंत्र दे दिया। पूरे देश में तीसरे मोर्च की सियासत शुरू हो गई।
गैर कांग्रेस, गैर भाजपा की बात होने लगी। लगे हाथ तेलगु देशम पार्टी ने एनडीए को झटका दे दिया। उन्होंने अपने आप को इस गठबंधन से अलग कर लिया। कांग्रेस पार्टी हर हाल में भाजपा की हार देख रही है। उसे लग रहा है भाजपा हारेगी, तभी उसे मौका मिलेगा। फिर वो मौका, तीसरे मोर्चे के साथ ही क्यों न हो ?
ऐसा इसलिए, क्योंकि कांग्रेस महाधिवेशन ने अपने संकल्प पत्र में गठबंधन की बात कही है। इस पर सकारात्मक ढंग से अपना विकल्प खुला रखा है।
वैसे, गोरखपुर से पहले मध्यप्रदेश और राजस्थान उपचुनाव में भी भाजपा हार चुकी है।
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