देश भर में ज़बर दस्त विरो’ध के बीच नागरि कता कानू’न दस जनवरी से सर कार ने लागू कर दिया है. इसके अलावा इस मामले में राज्य सर कर के भूमिका को ख़त्म करते हुए सर कार नाग रिकता देने को लेकर ऑन लाइन प्रक्रि’या देने पर विचा’र कर रही है. आपको बता दें कि छह राज्यों ने इन कानू’न को मानने से इन कार कर दिया है. ऐसे में कहा जा रहा है कि उनका विरो’धी रुख देखते हुए सर कार ने यह कदम उठाने पर विचार कर रही है.
वहीँ अभी जो नाग रिकता देने की प्रक्रिया है उसमे जिला धिकारी के माध्यम से आवेदन करने का नियम है. लेकिन अगर सर कार इस पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर देगी तो इसमें जिला धिकारी का रोल पूरी तरह से ख़त्म हो जायेगा. इसके अलावा केंद्र सर कार कहना है कि राज्य सर कार के पास ऐसी कोई ताक़त है जिससे कि वह इस क़ानून को अपने यहाँ लागू होने से रोक सके. केंद्र सर कार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि राज्य सर कार ऐसा नहीं कर सकती हैं और न ही वह इस पर कोई
क़ानून बना सकती हैं. उनके क़ानून बनाने विषय दूसरे हैं. मसलन वह कर संग्रह, भू संपदा से जुड़े मामलों पर क़ानून बना सकती है. इसके अलावा कुछ विषयों जैसे कृषि वग़ैरा पर दोनों सर कार क़ानून बना सकती हैं. आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल, केरल और पंजाब जैसे ग़ैर भाजपा शासित राज्यों ने इस क़ानून को अपने यहाँ लागू करने से साफ़ इंकार कर दिया है.
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