राजस्थान में अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र में सात माह की एक मासूम बच्ची का अपहरण कर दुष्कर्म करने के आरोपी पिंटू को पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई गई है. खास बात ये है कि इस मामले में अदालत ने मात्र 70 दिन में सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुनाया. पुलिस ने 27 दिन में ही चार्जशीट अदालत में पेश कर दी थी.
पुलिस महानिदेशक ओ. पी. गल्होत्रा ने बताया कि पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी करार देने की यह पहली कार्रवाई है. उन्होंने बताया कि 12 साल से कम आयु की बच्चियों से दुष्कर्म के मामले में कठोर सजा देने के लिए 21 अप्रैल 2018 को यह दण्ड विधि संशोधन अस्तित्व में आया था.
विशेष न्यायाधीश (अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण प्रकरण) जगेन्द्र अग्रवाल ने इस मामले में 12 पेशियां लगाते हुए 22 अदालती दिवसों में सुनवाई पूरी की. अन्तिम बहस 17 जुलाई को हुई और 18 जुलाई को आरोपी को दोषी करार दे दिया गया. दोषी को सजा का फैसला 21 जुलाई को सुनाया गया.
पीड़िता के पिता ने नौ मई 2018 को अपनी बच्ची से दुष्कर्म होने की सूचना दी थी. बच्ची के पिता ने बताया कि बच्ची अपनी दृष्टिबाधित दादी के पास सो रही थी. आरोपी पिंटू मासूम को खिलाने के बहाने उठाकर ले गया था. पुलिस ने आरोपी के विरूद्व भारतीय दंड संहिता की धारा 363,366ए, 376 आईपीसी 3/4 और पॉक्सो अधिनियम में मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी थी. उन्होंने बताया कि नामजद आरोपी पिन्टू ने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया. पुलिस ने मात्र 27 दिन में जांच का काम पूरा करके अदालत में चालान पेश कर दिया था.
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