बिल्थरारोड -तुर्तीपार पुल हादसे के लिहाज से डेंजर जोन, प्रसाशन लापरवाह

बिल्थरारोड। बलिया-सोनौली मार्ग पर स्थित तुर्तीपार रेग्युलेटर पुल हादसे के लिहाज से डेंजर जोन बनता जा रहा है। पुल संकरा होने के कारण आए दिन आवागमन के समय खासकर रात में दुर्घटनाएं होती रहती हैं। .

पिछले एक महीने के आंकड़ों पर गौर करें तो सकरे पुल के चलते दो व्यक्तियों की मौत हो गई और आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। एक सप्ताह पहले नवानगर स्थित अस्पताल पर तैनात फार्मासिस्ट की इस पुल के पास दुर्घटना होने से मौत हो गयी थी। पुल पर लगातार बढ़ रहे हादसों की रोकथाम की दिशा में संबंधित अधिकारी संजीदा नहीं है। इसके चलते लोगों में नाराजगी है। तुर्तीपार रेगुलेटर पुल का मार्ग एकल होने के चलते संकरा है। जबकि पुल के दोनों तरफ चौड़ा राजमार्ग सड़क है और पुल काफी संकरा है। .

तुर्तीपार रेगुलेटर पुल का मार्ग एकल होने के चलते संकरा है। जबकि पुल के दोनों तरफ चौड़ा राजमार्ग सड़क है। रेगुलेटर के अत्यंत निकट बिना मानक वाले ऊंचाई में दोनों तरफ ठोकर बने हुए हैं। रात में तेज गति से आने वाले वाहन ऊंचे ठोकर से उछलकर रेगुलेटर की रेलिंग और दीवार से टकरा कर पुल में गिर पड़ते हैं, जिससे अक्सर दुर्घटनाएं हो रही हैं। ऐसे में पुल के वन-वे रोड को डबल लेन सड़क करते हुए मानक के अनुसार कम ऊंचाई वाले ठोकर का निर्माण आवश्यक है।

प्रधान संघ के अध्यक्ष तुर्तीपार निवासी आलोक कुमार सिंह ने बताया कि दोनों तरफ राजमार्ग होने से सड़क चौड़ी है और रेग्युलेटर पुल का सड़क काफी सकरा है। इसके चलते तेज रफ्तार से आने वाले वाहन को अचानक रेग्युलेटर का सकरा रोड आते ही अनियंत्रित हो जाते हैं, जिससे दुर्घटनाएं हो जाती हैं। उन्होंने रेग्युलेटर से गतिअवरोधक को कुछ दूरी पर बनाकर उस पर रेडियम पट्टी लगाने की मांग की है। साथ ही रेग्युलेटर के किनारे से चौड़ी सड़क बनाकर राजमार्ग से जोड़ने की भी वकालत की ताकि आवागमन के समय वाहन चालकों को सुविधा हो सके तथा यातायात सुगम हो सके। इससे आए दिन होने वाले हादसों पर भी विराम लग सकेगा।

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