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बलिया में सड़कें खस्ताहाल, गड्ढे बने जानलेवा, जान जोखिम में डाल कर सफर कर रहे लोग

सरकार पूरे प्रदेश में सड़कों का जाल बिछाने के दावे करती हैं, लेकिन बलिया में सरकार के यह दावे पूरी तरह से फेल होते नजर आ रहे हैं। गांवों की बात तो छोड़िए, यहां शहरों के मुख्यमार्ग के हालात भी बदतर नजर आ रहे हैं।

शासन की लाख कोशिशों के बावजूद भी सड़कें गड्ढों से पटी हैं। लोग जान जोखिम में डालकर सफर करते हैं। 2017 में सरकार ने सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का आदेश जारी किया था, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से आज तक सड़कों की मरम्मत नहीं हो पाई। कहीं मरम्मत हुई भी तो, कुछ ही दिनों में सड़कों दोबारा गड्ढों से पट गईं।

एचएच 31 यू तो जनपद का सबसे अहम मार्ग है। लेकिन यहां बलिया-बैरिया मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। इससे बिहार ही नहीं बल्कि पूर्वात्तर राज्यों के वाहनों का आवागमन होता है लेकिन फिर भी यहां के हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे है। इसका खामियाजा इस मार्ग से सफर करने वाले राहगीरों को उठाना पड़ रहा है।

बलिया-गोरखपुर राजमार्ग पर चौकिया मोड़ से लेकर तेनुआ तक की सड़क के निर्माण को भी आधा-अधूरा ही छोड़ दिया गया। बिल्थरारोड क्षेत्र की सड़कें भी पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। सदर, सिकन्दरपुर, रसड़ा व बांसडीह तहसील क्षेत्रों में भी सम्पर्क मार्गों का हाल बेहाल है। मरम्मत के लिये कुछ जगहों के लोग आंदोलन भी कर चुके हैं, हालांकि इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका है।

हालात यह हैं एचएच31 हादसों का घर बना हुआ है। आए दिन यहां पर सड़क हादसे होते हैं, जिसमें कईयों की जान जा चुकी है। करीब 2 महीने पहले भी फेफना के वैना के पास क्षतिग्रस्त सड़क के गड्ढें में ई-रिक्शा के पलट जाने से कांग्रेस नेता पवन चौबे की मौत हो गई। बैरिया क्षेत्र में वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का प्रमुख कारण खराब व जर्जर हो चुकी है। एनएच पर फेफना से भरौली के बीच मरम्मत के नाम पर एनएचआई की ओर से केवल चिप्पी या यूं कहें की पेबंद साटकर छोड़ दिया गया है। उक्त रास्ता अब भी खराब है तथा राहगीरों को आने-जाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

Rashi Srivastav

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